1986 में हुए बोफोर्स तोप सौदे के बाद भारतीय सेना का तोपखाना शानदार तोप के लिए तरस रहा था। डीआरडीओ ने इसे अच्छी उम्मीद दिखाई है। डीआरडीओ ने 155 एमएम 52 कैलीबर की एडवांस टोड आर्टिलरी गन (एटीएजी) विकसित की है। एटीएजी परीक्षण में खरी उतरी है। 30 सेकेंड में स्वचालित प्रणाली के सहारे 48 किमी दूर निशाने पर पांच गोले दागती है।
किसी तोप से नहीं है मुकाबला
डीआरडीओ के वैज्ञानिक बताते हैं कि विश्व में उपलब्ध तोप 6वें जोन तक फायर करती है, हमारी 7वें जोन तक फायर करती है। परीक्षण के दौरान 200 गोले दागे गए। 80 फीसदी गोले 45 किमी से अधिक और अधिकतम 48 किमी दूर के टारगेट को ध्वस्त करने में सफल रहे। जबकि अन्य तोप 30 सेकंड में 35-40 किमी दूर केवल तीन गोले दागने की क्षमता रखती है। टारगेट भेदने की सटीकता में भी इसका कोई जवाब नहीं है।
डीआरडीओ, भारत फोर्ज, टाटा डिफेंस का प्रोडक्ट
भारत फोर्ज के चेयरमैन बबा साहब नीलकंठ कल्याणी का कहना है कि डीआरडीओ की तकनीक के साथ भारत फोर्ज की इंजीनियरिंग से इसे बनाया जा सका। इसमें टाटा डिफेंस ने भी हमारा साथ दिया है। भारत फोर्ज इसके अलावा टैंक, बख्तरबंद वाहन, तोप तथा रक्षा साजो सामान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर का साजो-सामान तैयार कर रहा है।