कलकत्ता उच्चन्यायालय ने बंगाली अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा की ओर से जुलाई में छात्रों की एक विरोध रैली में दिखाए गए पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आपत्तिजनक चित्रण पर हैरानी जताई है, लेकिन इस मामले में दर्ज एफआईआर में गिरफ्तारी से उन्हें सुरक्षा दी है।
क्या है पूरा मामला?
24 जुलाई को कोलकाता की सड़कों पर कई लोगों ने कथित नीट परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। यह घटनाक्रम केंद्रीय शिक्षा मंत्री के दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में छात्रों के विरोध के बाद इस्तीफा देने से एक दिन पहले हुआ था।
मित्रा मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके में हुए प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। एक पोस्टर पकड़े हुए तस्वीर खिंचवाई थी। भाजपा की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, पोस्टर में प्रधानमंत्री की एक आपत्तिजनक तस्वीर दिखाई गई थी।
कोर्ट ने क्या कहा?
उनके खिलाफ कई जिलों में कई शिकायतें भी दर्ज कराई गई थीं। एफआईआर को रद्द करने की मित्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कहा, 'कार्टून का स्वरूप देखकर कोर्ट को गहरा धक्का लगा है।'
कोर्ट ने क्या सवाल पूछा है?
पोस्टर को 'अशोभनीय प्रस्तुति' बताते हुए उन्होंने कहा, 'देश के किसी भी समझदार नागरिक को इसे पोस्ट नहीं करना चाहिए था।' हाईकोर्ट के जज ने एक्ट्रेस के वकील विकास रंजन भट्टाचार्य से जानना चाहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री का ऐसा आपत्तिजनक कार्टून क्यों दिखाया। इस पर मित्रा के वकील ने माना कि पोस्टर वास्तव में अशोभनीय था, लेकिन इससे कानून की किसी आपराधिक धारा का उल्लंघन नहीं होता है।
कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?
जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा, '24 दिसंबर तक इस कोर्ट की अनुमति के बिना याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।' उन्होंने कहा कि अगर मित्रा जांच में सहयोग करती हैं तो उन्हें यह सुरक्षा आगे भी दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि मामले के सिलसिले में जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए मित्रा को 48 घंटे का नोटिस दिया जाना चाहिए।
अगली सुनवाई कब है?
पुलिस को निर्देश दिया कि वे 14 दिसंबर को अगली सुनवाई की तारीख पर प्रोग्रेस रिपोर्ट दाखिल करें। गुरुवार को याचिका पेश करते हुए, मित्रा के वकील ने बताया कि उन्होंने जुलाई में नीट प्रश्न पत्र लीक के विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था और पोस्टर में एक कार्टून दिखाया था, जिसके कारण पश्चिम बंगाल के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में उनके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज की गईं।
उन्होंने तर्क दिया कि शिकायतों में अभिनेत्री के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है, और सभी एफआईआर को एक साथ जोड़ने और उन्हें रद्द करने की मांग की। इस मांग का विरोध करते हुए, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने कहा कि कार्टून अभद्र था और यह अपने आप में एक अपराध है। कोर्ट ने गौर किया कि मित्रा के खिलाफ विभिन्न पुलिस स्टेशनों में 16 एफआईआर दर्ज हैं।