सरकार ने बुनियादी ढांचा क्षेत्र में बड़ी रकम खर्च करने, पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु में राजमार्गों के निर्माण की घोषणा कर भविष्य में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर ध्यान दिया है। कोरोना के कारण संकटों में घिरी अर्थव्यवस्था के बीच इससे बेहतर बजट नहीं हो सकता था। बजट का संदेश साफ है। भविष्य में अर्थव्यवस्था की गाड़ी सुधार की पटरी पर तेजी से दौड़ेगी। इसके साथ ही यह स्पष्ट कर दिया है कि रकम जुटाने के लिए सरकार पुराने फॉर्मूले के सुधारों का ही सहारा लेगी।
बेहद दुरुह परिस्थिति में आम बजट की घोषणाओं के जरिये सरकार ने रोजगार बढ़ाने पर ध्यान दिया है। राजमार्गों का निर्माण, सात नए टेक्टाइल्स पार्क, मछली पालन क्षेत्र में की गई कई घोषणाएं जब जमीन पर उतरेंगी तो यह व्यवस्था को मजबूती देने वाली साबित होंगी।
कई क्षेत्रों में नए रोजगार का सृजन होगा। भारतीय जीवन बीमा निगम में निवेश की सीमा को 75 फीसदी करने और पीएसयू को बेचने की स्पष्ट घोषणा भी बड़े आर्थिक सुधार की ओर सरकार के तेजी से आगे बढ़ने का साफ इशारा कर रही है।
दरअसल कोरोना के कारण जिस प्रकार देश की अर्थव्यवस्था लडखड़ाई हुई है, उससे सरकार के सामने इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। इस परिस्थिति में आयकर सहित अन्य क्षेत्र में राहत के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता था। मैं इसे बोल्ड बजट इसलिए बता रहा हूं, क्योंकि वित्तमंत्री ने तमाम आशंकाओं के बावजूद न तो नया कर लादा है और न ही आम लोगों पर किसी तरह का बोझ ही बढ़ाया है।
सरकार के पास चारा नहीं
मौजूदा परिस्थिति में सरकार के पास सुधारों पर तेजी से आगे बढ़ने के अलावा कोई चारा नहीं है। विकास दर में भारी गिरावट और अर्थव्यवस्था के कारण उत्पन्न माली स्थिति के कारण सरकार लोगों पर नया बोझ नहीं डाल सकती थी। सीधे शब्दों में कहें तो देश की अधिकांश आबादी अभी अतिरिक्त बोझ झेलने की स्थिति में भी नहीं है।
- अभीक बरुआ, अर्थशास्त्री