'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर अमेरिका के प्रसिद्ध शहरी युद्ध विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने कहा है कि यह भारत की एक निर्णायक सैन्य जीत है जिसने न केवल आतंक के खिलाफ उसकी रणनीति को नए स्तर पर पहुंचाया है, बल्कि पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश भी दे दिया है कि अब आतंक का जवाब युद्ध से मिलेगा। जॉन स्पेंसर, जो कि मॉडर्न वॉर इंस्टीट्यूट में शहरी युद्ध अध्ययन के चेयरमैन हैं, उन्होंने एक्स पर अपने विस्तृत लेख में कहा कि 7 मई को भारतीय वायुसेना की तरफ से किए गए नौ सटीक हमलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद प्रमुख आतंकवादी शिविरों को तबाह कर दिया।
भारत की नई नीति- अब न चुप रहना, न सहना
जॉन स्पेंसर के मुताबिक, भारत ने पहले की तरह न तो संयुक्त राष्ट्र का दरवाजा खटखटाया, न ही पाकिस्तान को कोई चेतावनी दी। भारत ने सीधे लड़ाकू विमान भेजे और सटीक निशानों पर हमला किया। यह एक सिर्फ प्रतीकात्मक कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक सोच-समझकर की गई सैन्य रणनीति थी। उन्होंने कहा कि भारत ने इस कार्रवाई से यह संदेश दिया कि अब पाकिस्तान की जमीन से हुआ आतंकी हमला सीधा युद्ध माना जाएगा।
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नए भारत की नई सैन्य सोच- जॉन स्पेंसर
उन्होंने कहा कि भारत की यह कार्रवाई दिखाती है कि भारत अब परमाणु धमकी से नहीं डरता। भारत अब आतंकवाद और बातचीत को एक साथ स्वीकार नहीं करेगा- खून और पानी साथ नहीं बह सकते यही भारत का नया सिद्धांत है। भारत अब पुराने युद्ध की नहीं, आने वाले युद्धों की तैयारी कर रहा है।
रणनीति में बदलाव- बदले की नहीं, रोकथाम की नीति
जॉन स्पेंसर ने कहा कि इस ऑपरेशन का मकसद बदला लेना नहीं था, बल्कि यह दिखाना था कि भारत अब आतंक के खिलाफ दृढ़ नीति पर चल रहा है। उनके शब्दों में,'भारत ने एक झटका सहा, लक्ष्य तय किया, और उसे प्राप्त कर लिया – वह भी सीमित समय और सीमित दायरे में।'
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दुनिया के लिए उदाहरण बना भारत- जॉन स्पेंसर
उन्होंने कहा कि जब दुनिया भर में युद्ध लंबे समय तक खिंचते हैं और अक्सर उद्देश्यहीन हो जाते हैं, भारत ने एक सीमित युद्ध का उदाहरण पेश किया है – जहां उद्देश्य साफ था, तरीका स्पष्ट था और नेतृत्व मजबूत। जॉन स्पेंसर ने भारत की संयम की भी सराहना की। उन्होंने लिखा, 'भारत का संयम उसकी कमजोरी नहीं, उसकी परिपक्वता है। उसने दुश्मन को लागत चुकाई, नई सीमा रेखा खींची और रणनीतिक बढ़त कायम रखी।' स्पेंसर के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यह रणनीतिक विराम है, न कि स्थायी युद्धविराम। यदि फिर से हमला हुआ, तो भारत फिर से वैसे ही जवाब देगा।