मेघालय हाईकोर्ट ने गारो हिल्स ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया, जिसमें चुनाव लड़ने के लिए ST प्रमाणपत्र अनिवार्य किया गया था। अदालत ने कहा कि यह फैसला बिना जरूरी विधायी प्रक्रिया और राज्यपाल की मंजूरी के लिया गया।
मेघालय उच्च न्यायालय ने गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (GHADC) की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसमें चुनाव लड़ने के लिए अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाणपत्र अनिवार्य करने का प्रावधान किया गया था। अदालत ने यह पाया कि इसमें उचित विधायी प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया है।
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यह अधिसूचना पिछले महीने जीएचएडीसी की कार्यकारी समिति के प्रस्ताव के बाद मुख्य कार्यकारी सदस्य की ओर से जारी की गई थी। इसके तहत आगामी परिषद चुनावों में गैर-जनजातीय उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकने का प्रावधान किया गया था।
मामले में एक मतदाता ने याचिका दायर कर इस अधिसूचना को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि यह नियम असम और मेघालय स्वायत्त जिले (जिला परिषदों का गठन) नियम, 1951 का उल्लंघन करता है, जो मतदाताओं और उम्मीदवारों की योग्यता तय करता है।
याचिकाकर्ता ने क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि इस अधिसूचना के जरिए बिना नियमों में संशोधन किए वैध गैर-जनजातीय मतदाताओं और उम्मीदवारों के अधिकार छीन लिए गए। साथ ही, नियम 72 के तहत जिला परिषद और राज्यपाल की मंजूरी भी नहीं ली गई।
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GHADC की ओर से कहा गया कि यह कदम जनसंख्या में बदलाव के बीच जनजातीय हितों की रक्षा के लिए उठाया गया था और इसे कार्यकारी समिति की आपात शक्तियों के तहत जारी किया गया।
हाईकोर्ट का तर्क
हालांकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कार्यकारी समिति केवल नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दे सकती है। ऐसे किसी भी बदलाव को लागू होने से पहले जिला परिषद और राज्यपाल की मंजूरी आवश्यक है। अदालत ने कहा कि अधिसूचना कानूनी जांच में टिक नहीं सकती और इसे निरस्त किया जाता है। इसके साथ ही अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया।