सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि मैं इस हमले की कड़ी निंदा करता हूं। आतंकियों और आतंकी गतिविधियों को देश से बाहर निकाल देना चाहिए। हमें उनके प्रति सहानुभूति दिखाने की जरूरत नहीं है। ये आतंकी जहां भी हों, उनके साथ उचित व्यवहार किया जाना चाहिए। संभवतः यह खुफिया विफलता है।
पहलगाम हमले में मारे गए बंगलूरू के भारत भूषण को सीएम सिद्धारमैया ने श्रद्धांजलि दी। उन्होंने मृतक के परिजनों से भी बात की। सीएम ने पहलगाम हमले को खुफिया विभाग की विफलता बताया।
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सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि मैं इस हमले की कड़ी निंदा करता हूं। आतंकियों और आतंकी गतिविधियों को देश से बाहर निकाल देना चाहिए। हमें उनके प्रति सहानुभूति दिखाने की जरूरत नहीं है। हम केंद्र सरकार के साथ हैं। मैं मांग करता हूं कि केंद्र सरकार आतंकवाद को खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाए। लोगों को उनकी पत्नियों और बच्चों के सामने मारना कायरतापूर्ण कृत्य है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पुलवामा की घटना भी हुई थी। फिर से ऐसा नहीं होना चाहिए। ये आतंकी जहां भी हों, उनके साथ उचित व्यवहार किया जाना चाहिए। संभवतः यह खुफिया विफलता है। हमारे पास खुफिया जानकारी की कमी थी। मधु बंगारप्पा ने शिवमोगा का दौरा किया और रामलिंगा रेड्डी अंतिम संस्कार तक यहां रहेंगे। हमारी सरकार ने परिवारों को 10 लाख रुपये देने की घोषणा की है और हम उनके साथ खड़े हैं। मैंने संतोष लाड को कश्मीर भेजा और उनसे उन लोगों को वापस लाने के लिए कहा जिन्होंने अपनी जान गंवाई और 177 लोग जो कश्मीर में हैं। यह सरकार की जिम्मेदारी और कर्तव्य है। केंद्र सरकार ने पहले ही कुछ कार्रवाई की है और हम केंद्र सरकार के साथ हैं। हम मांग करते हैं कि केंद्र सरकार सख्त कार्रवाई करे।
भाजपा नेता सीटी रवि ने कहा कि हमने मृतक भारत भूषण के परिवार से बात की। उनकी पत्नी ने हमें बताया कि उन्होंने हमलावरों से विनती की थी कि वे भूषण को छोड़ दें क्योंकि उनका एक छोटा बच्चा था। लेकिन उन्हें नहीं छोड़ा गया। उन्हें कलमा पढ़ने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने जवाब दिया कि वे हिंदू हैं, इसलिए उन्हें कलमा पढ़ना नहीं आता। इसलिए उन्हें मार दिया गया। जब उनकी पत्नी ने (हमलावरों से) कहा कि वे उसे भी मार दें, तो उन्हें कहा गया कि वे जाकर मोदी को इस घटना के बारे में बताएं। वे इस्लाम का पालन न करने वालों को काफिर मानते हैं। जब तक यह सोच नहीं बदलेगी, दुनिया में शांति नहीं होगी। दुनिया में हर कोई जानता है कि आतंकवादियों के प्रशिक्षण केंद्र कहां हैं। पहले कदम के रूप में कूटनीतिक कदम जरूरी थे। अब सर्जिकल स्ट्राइक की जरूरत है।