केंद्र सरकार ने अचानक बाजार से 50 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी उठाने की घोषणा कर ब्याज दरों में कटौती और अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीदों को धुमिल कर दिया है। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) से उम्मीद से कम वसूली के कारण सरकार द्वारा उठाए जा रहे इस कदम के कारण 3.2 फीसदी के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करना भी मुश्किल लग रहा है। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच की ताजा रिपोर्ट में यह अनुमान जाहिर किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार द्वारा अपनी उधारी में 50 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी करने का फैसला टाला जा सकता था क्योंकि सरकार प्रतिभूतियों का बाजार पहले से ही घबराहट का माहौल है। सरकार द्वारा बैंकों को वित्तीय मदद की घोषणा के बाद उधारी बढ़ाने की घोषणा ने निकट भविष्य में ब्याज दरों में कमी किए जाने की संभावना को खत्म कर दिया है। इसकी वजह से अर्थव्यवस्था को पटरी पर आने में भी समय लग सकता है।
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