जरा सी बात पर उसने भले ही जहर खा कर अपनी जिंदगी खत्म कर ली हो लेकिन जाते-जाते दो को जिंदगी दे गई शकुंतला। शंकुतला ने माता पिता से हुई बहस के बाद कीटनाशक पी लिया था, आनन फानन में उसे अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका। लेकिन शंकुतला की किडनी ने दो लोगों को नई जिंदगी जरूर दे दी है।
सफ्दरजंग अस्पताल में यूरोलोजी और रीनल ट्रांसप्लांट के हेड प्रोफेसर डॉ. अनूप कुमार कहते हैं, शायद यह दुनिया का पहला मामला है जब किसी ने अपनी जिंदगी को खत्म करने के लिए जहर खाया हो और उसके अंग का प्रत्यारोपण किया गया हो।
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शकुंतला की किडनी जिस 39 वर्षीय महिला को दी गई उसकी तीन साल पहले किडनी फेल हो गई थी और वो डायलिसिस पर थी। वह दो साल से ज्यादा जिंदा नहीं रह सकती थी। लेकिन किडनी प्रत्यारोपण के बाद अब वह अपनी पूरी जिंदगी जी सकती है।