पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधी मारन और उनके भाई कलानिथी मारन पर केस चलाया जाएगा। उनपर अवैध टेलीफोन एक्सचेंज मामले में मुकदमा चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने से इंकार कर दिया है। मद्रास हाईकोर्ट ने दयानिधि मारन और अन्य आरोपियों को आरोप मुक्त करने के सीबीआई कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'आरोप है कि आपने अपने भाई के टीवी के लिए फोन का इस्तेमाल किया। आपको ट्रायल का सामना करना पड़ेगा।' कोर्ट ने दशक पुराने मामले में मारन की अपील को खारिज कर दिया। पिछले हफ्ते मद्रास हाईकोर्ट ने
दयानिधि और उनके भाई कलानिथी (सन समूह के मुखिया) के साथ 12 लोगों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। विशेष सीबीआई कोर्ट ने मार्च में मारन और दूसरे आरोपियों को मुक्त कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। इस मामले का निर्णय ट्रायल के जरिए ही होगा। 51 साल के दयानिधि मारन पर आरोप है कि 2004-06 में यूपीए-1 सरकार में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रहते हुए उन्होंने अपने घर में अवैध तरीके से एक टेलिफोन एक्सचेंज लगाया था। जिसकी वजह से सरकार को 1.78 करोड़ रुपए का चूना लगा था क्योंकि इसका बिल नहीं लिया गया। इस नेटवर्क का इस्तेमाल सन के कारोबारी लेनदेन के लिए हुआ।
इस एक्सचेंज में सरकार द्वारा संचालित बीएसएनएल के जरिए 300 हाई-स्पीड की कथित लाइनें लगाई गई थीं। जिनका प्रयोग सन की बिजनेस ट्रांजेक्शन और डाटा ट्रांसफर के लिए किया जाता था। सीबीआई द्वारा आरोप मुक्त होने पर दयानिधि ने कहा था कि न्याय की जीत हुई है और मैं सही हूं। बता दें कि मारन 2जी घोटाला औप एयरसेल-मैक्सिस मामले से पहले ही बरी हो चुके हैं।