कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के राजनीतिक सचिव नसीर अहमद को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार एमएलसी नसीर अहमद पर दावणगेरे दक्षिण विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ काम करने का आरोप है।
दावणगेरे दक्षिण सीट से विधायक 94 वर्षीय विधायक शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के चलते यहां उपचुनाव हुए थे। कांग्रेस ने इस सीट से शमनूर के पोते समर्थ शमनूर को उम्मीदवार बनाया था। समर्थ कर्नाटक के खनन और भूविज्ञान मंत्री एस.एस. मल्लिकार्जुन के बेटे हैं।
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मुस्लिम नेताओं को समझाने में नाकामयाब रही कांग्रेस
13 अप्रैल के एक सरकारी अधिसूचना में कहा गया, "नसीर अहमद को मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव के पद से तत्काल प्रभाव से मुक्त किया जाता है।" इससे तीन दिन पहले, कांग्रेस एमएलसी अब्दुल जब्बार ने कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।
सीएम सिद्धारमैया ने मंगलवार को आवास, अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ मंत्री बी.जे. जमीर अहमद खान को अपने कार्यालय-निवास पर तलब किया था। खान ने संवाददाताओं से कहा, "मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मुझे आधे घंटे में अपने निवास पर बुलाया है। मैं अभी वहां जा रहा हूं।"
खुलकर सामने आई आंतरिक कलह
इन मुस्लिम नेताओं पर समर्थ शमनूर के खिलाफ काम करने का आरोप है। समर्थ के नाम की घोषणा के बाद से ही सत्तारूढ़ कांग्रेस में असंतोष की आवाजें उठ रही थीं। एक बागी कांग्रेस उम्मीदवार, सादिक पहलवान, ने दावणगेरे दक्षिण से नामांकन पत्र दाखिल किया था, लेकिन बाद में सिद्धारमैया के मनाने पर उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया था। हालांकि, कांग्रेस में असंतोष जारी रहा, क्योंकि अधिकांश मुस्लिम नेताओं ने प्रचार से दूरी बनाए रखी।
मुस्लिम उम्मीदवार की हो रही थी मांग
दावणगेरे दक्षिण में मुस्लिम आबादी अच्छी खासी है। इसी के चलते मुस्लिम नेता अपने समुदाय से उम्मीदवार चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने समर्थ शमनूर को प्राथमिकता दी। मंत्री खान के अनुसार, यह कोई छिपी बात नहीं थी कि मुस्लिम नेताओं ने समुदाय से किसी को टिकट देने की मांग की थी।
मंत्री ने बताया कि 20 मार्च को कांग्रेस के महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कांग्रेस कार्यालय में एक बैठक बुलाई थी, जिसमें दावणगेरे से 200 से अधिक नेता शामिल हुए थे, जिनमें बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक नेता थे।
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क्या बोले मंत्री खान?
जमीर अहमद खान ने कहा, "मैंने एक खुली बैठक में कहा था: कृपया हमें एक मुस्लिम उम्मीदवार दें, सर। दावणगेरे किसी (मुस्लिम समुदाय से) को दे दें। मैंने यह बात खुले तौर पर बैठक में कही थी। बंद दरवाजों के पीछे कुछ भी नहीं कहा गया।" मंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने बैठक में कहा था कि अगर उम्मीदवार नहीं जीता तो वह मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे।
नसीर अहमद की बर्खास्तगी पर खान ने कहा, "मुझे सिर्फ इतना पता चला है कि उन्होंने (अहमद) इस्तीफा दे दिया है। मुझे कारण नहीं पता। मुझे पता चला है कि सीएम ने उन्हें दावणगेरे जाने को कहा था और चूंकि वह नहीं गए, इसलिए एक निर्णय लिया गया है। अभी, मैं सीएम के निवास की ओर जा रहा हूं।"
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