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RSS Centenary: 'लोगों के स्नेह और समर्थन से आरएसएस कर पाया 100 वर्ष की यात्रा', संघ की शताब्दी पर बोले होसबाले

Thu, 02 Oct 2025 07:41 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि पिछले 100 वर्षों में विरोध के बावजूद जनता के स्नेह से संघ देश का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बना। पीएम मोदी द्वारा संघ की शताब्दी पर स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी करने से पहले उन्होंने इस कदम को संघ के निःस्वार्थ कार्यों की मान्यता बताया और सरकार का आभार व्यक्त किया।

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दत्तात्रेय होसबाले, महासचिव, आरएसएस - फोटो : ANI
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विस्तार
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि आरएसएस पिछले 100 वर्षों से, विरोध के बावजूद, जनता के स्नेह के कारण, सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बनने के लिए प्रयासरत है। होसबाले की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आरएसएस की शताब्दी के उपलक्ष्य में एक स्मारक डाक टिकट और एक सिक्का जारी करने से कुछ मिनट पहले आई। उन्होंने इस कदम के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि यह संघ के निःस्वार्थ कार्यों को मान्यता प्रदान करने के समान है।
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होसबाले ने कहा, संघ और उसके स्वयंसेवक 1925 में विजयादशमी के अवसर पर डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की ओर से इसकी स्थापना किए जाने के बाद से ही व्यक्तियों के चरित्र निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के अपने मिशन पर बिना किसी स्वार्थ के काम कर रहे हैं। वह केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

आरएसएस के दूसरे नंबर के पदाधिकारी ने कहा, यह संघ के स्वयंसेवकों और देशभक्तों के लिए खुशी की बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने इस विशेष अवसर पर एक डाक टिकट और सिक्का जारी करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, विदेश में रहने वालों समेत सभी स्वयंसेवकों की ओर से, मैं इसके लिए अपना आभार व्यक्त करना चाहता हूं। होसबाले ने आरएसएस के 100 वर्षों को एक दिलचस्प यात्रा बताते हुए कहा कि देश के लोगों की ओर से संघ के विचारों को मिले प्यार, समर्थन और स्वीकृति के कारण ही संघ इतनी दूर तक पहुंच पाया है। 
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आरएसएस का विचार भारत का विचार, जड़ों और संस्कृति में समाया
होसबाले ने कहा, आरएसएस का विचार भारत का विचार है, जो इसकी जड़ों, इसकी संस्कृति और इसकी सभ्यता में समाया हुआ है। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों से भारत के लोगों ने इस विचार का पालन किया है, इसे जीया है और एक श्रेष्ठ समाज के निर्माण के संकल्प के साथ इसे आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा, हम उस विचार, उस जीवन दर्शन, उस संस्कृति की पहचान हैं। होसबाले ने कहा कि संघ के विचार ने लोगों में फिर से आनंद जगाया है और उनमें यह विश्वास जगाया है कि वे दुनिया में सर्वश्रेष्ठ समाज के रूप में उभरने में सक्षम हैं।

देश देशभक्ति, अनुशासन व निस्वार्थ सेवा के प्रतीक के रूप में देख रहा
होसबाले ने कहा, आज देश संघ को देशभक्ति, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा के एक प्रभावशाली और सफल प्रतीक के रूप में देखता है। संघ समाज को संगठित कर उसके पुरुषार्थ को जागृत करने का प्रयास कर रहा है ताकि वह अपने मार्ग में आने वाली सभी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बन सके। होसबाले ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में दुनिया के सामने भारत की विकृत छवि प्रस्तुत करने के कुत्सित प्रयास किए गए।

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देश के भीतर और वैश्विक मंच पर भारत के विमर्श को करना है मजबूत
होसबाले ने कहा, एक नया रास्ता सामने आया है। हमें देश के भीतर और वैश्विक मंच पर भी भारत के विमर्श को मजबूत करना होगा। दुनिया भर में, भारत के बारे में भारत का विमर्श सकारात्मक और सत्य पर आधारित होना चाहिए। अपनी शताब्दी के इस अवसर पर संघ का यही विचार है।

समाज में पांच गुना परिवर्तन लाने के आरएसएस के एजेंडे के तहत, होसबोले ने लोगों से स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और अपनाने तथा भारत को आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया। अपने पंच परिवर्तन एजेंडे के साथ, आरएसएस देश के लोगों में भारतीय मूल्यों, सही पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने और अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन करने के साथ स्व की भावना का संचार करना चाहता है।
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