दूरसंचार कंपनियों की डेटा स्पीड को लेकर चल रही बहस के बीच टेलीकॉम नियामक ट्राई नए आयाम खोज रहा है। नियामक का डेटा मापने का एप माईस्पीड भी सवालों के घेरे में है। इस पर ट्राई के चेयरमैन आरएस शर्मा का कहना है कि डेटा स्पीड मापने को लेकर परामर्श किया गया है। जल्द उपभोक्ता हितों को केंद्र में रखकर निर्णय लिया जाएगा। डेटा स्पीड पर ट्राई के एप पर सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने बाकायदा विस्तृत अध्ययन के आधार पर सवाल उठाए हैं।
एसोसिएशन ने ट्राई के सचिव सुनील कुमार गुप्ता को एक पत्र लिखा है जिसके साथ अध्ययन को भी संलग्न किया गया है। हाल ही में निजी कंपनियों द्वारा डेटा स्पीड सबसे बेहतर होने को लेकर दावे किए गए थे। इसके बाद ट्राई के डेटा पर सवाल उठे, जियो से लेकर एयरटेल समेत अन्य विभिन्न एप के आधार पर दावा किया कि उन्हीं का 4जी डेटा की स्पीड सबसे तेज है।
हालांकि हकीकत ये है कि भारत मोबाइल इंटरनेट डाउनलोड स्पीड के मामले में दुनिया भर में 109वें स्थान पर है। इंटरनेट स्पीड की जांच करने वाली अमेरिकी कंपनी उक्ला ने इस पर एक रिपोर्ट जारी की थी। एक तरफ उपभोक्ता हैं, जिन्हें समुचित डेटा स्पीड नहीं मिल रही है। दूसरी तरफ कंपनियां इस पर बड़े-बड़े दावे कर रही हैं और एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रही हैं।
इसी बीच सीओएआई द्वारा नियामक ट्राई के ही एप पर सवाल उठाने से यह जंग और तेज हो गई है। सवाल उठने लगा है कि आखिर नियामक किसको आगे बढ़ा रहा है। हालांकि ट्राई चेयरमैन ने आरोप-प्रत्यारोप पर जवाब नहीं देते हुए कहा है कि इस पर जल्द निर्णय लेकर स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया जाएगा। सीओएआई ने कहा है कि माई स्पीड एप की खामियों को दूर करने का सुझाव भी ट्राई को दिया है। साथ ही कहा है कि सभी हिस्सेदारों के साथ बैठक कर विचार-विमर्श करे।
विशेषज्ञों से परामर्श कर रहा ट्राई
माना जा रहा है कि ट्राई इस मामले में ठोस कदम उठाने जा रहा है जिसके लिए विशेषज्ञों और दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हिस्सेदारों से परामर्श किया गया है। हाल ही में नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने दावा किया था कि देश 150 करोड़ गीगाबाइट खपत के साथ दुनिया का सबसे बड़ा डेटा उपभोक्ता हैं। उन्होंने कहा था कि यह अमेरिका और चीन की संयुक्त खपत से ज्यादा है।