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पड़ताल: गलत है पाकिस्तानी पायलटों को राफेल उड़ाने की ट्रेनिंग वाली खबर

Thu, 11 Apr 2019 07:38 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पाकिस्तानी पायलटों की ट्रेनिंग की खबर की पड़ताल - फोटो : Twitter
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जिस लड़ाकू विमान को लेकर भारत में राजनीति चरम पर है, पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर सवालों की बौछार कर रहे हैं उसे लेकर हुए नए खुलासे ने लोगों को हैरान कर दिया। एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन ने पाकिस्तानी पायलटों को राफेल उड़ाने की ट्रेनिंग दी है।
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विमानन क्षेत्र में कार्यरत ainonline ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया कि कतर के लिए नवंबर 2017 में जिन पायलटों को राफेल उड़ाने की ट्रेनिंग दी गई उसमें पाकिस्तानी पायलट भी शामिल थे। फ्रांस के मॉन्ट-डे-मार्सान में 1 अक्टूबर 2017 को पहला कतर राफेल स्क्वाड्रन स्थापित किया गया था।

एक भारतीय मीडिया हाऊस से बातचीत में दसॉल्ट ने कहा कि उन्हें फ्रांस में प्रशिक्षित पाकिस्तानी एक्सचेंज पायलटों की जानकारी नहीं है। 

वहीं भारत में फ्रांस के राजदूत अलेक्जेंड्रे जिग्लर ने पाकिस्तानी एयरफोर्स पायलटों को राफेल विमान उड़ाने की ट्रेनिंग की खबरों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि "मैं पुष्टि कर सकता हूं कि यह गलत खबर है।"
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इसका मतलब यह हुआ कि यह खबर पूरी तरह गलत है कि पाकिस्तानी पायलटों को राफेल उड़ाने का प्रशिक्षण दिया गया था। गौरतलब है कि कतर को पहला राफेल लड़ाकू विमान 6 फरवरी को दसॉल्ट ने सौंपा था। कतर ने मई 2015 में 24 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए दसॉल्ट से समझौता किया था। हालांकि उसने दिसंबर 2017 को 12 और लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिया था।

बता दें कि पाकिस्तानी सैन्य बल मध्य-पूर्व के कई देशों में एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत कार्यरत हैं। जिसमें कतर भी शामिल है।
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जॉर्डन ने पाक को दिए 13 एफ-16 लड़ाकू विमान

एफ-16 लड़ाकू विमान (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को एफ-16 फाइटर प्लेन की और इकाईयों को बेचने से मना करने और कलपुर्जों के निर्यात पर पाबंदी लगाने के बाद हमारे पड़ोसी देश ने जॉर्डन की शरण ली। पाक ने जॉर्डन से 13 एफ-16 ए/बी लड़ाकू विमान और कलपुर्जे खरीदे हैं। इसमें से कुछ विमानों का उपयोग पाकिस्तान भारतीय सीमा पर कर रहा है।

जनवरी 2018 में एक पाकिस्तानी समाचार पोर्टल ने कतर एयर फोर्स के कमांडर की पाकिस्तानी वायुसेना मुख्यालय के दौरे की सूचना प्रकाशित की। उसने यह भी लिखा कि पाकिस्तान के वायुसेना प्रमुख ने कथित तौर पर कतर के कमांडर को विमानन और सैन्य प्रशिक्षण के क्षेत्र में समर्थन और सहयोग की पेशकश की थी।

राफेल की खूबियां

राफेल विमान (सांकेतिक चित्र)
  • राफेल एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है। 
  • अधिकतम भार उठाकर इसके उड़ने की क्षमता 24500 किलोग्राम है।
  • विमान में फ्यूल क्षमता- 17,000 किलोग्राम किलोग्राम है।
  • यह दो इंजन वाला लड़ाकू विमान है, जो भारतीय वायुसेना की पहली पसंद है। हर तरह के मिशन में भेजा जा सकता। 
  • 24,500 किलो उठाकर ले जाने में सक्षम और 60 घंटे अतिरिक्त उड़ान की गारंटी। 
  • 150 किमी की बियोंड विजुअल रेंज मिसाइल, हवा से जमीन पर मार वाली स्कैल्प मिसाइल। 
  • स्कैल्प मिसाइल की रेंज 300 किमी, हथियारों के स्टोरेज के लिए 6 महीने की गारंटी। 
  • राफेल की अधिकतम स्पीड 2,130 किमी/घंटा और 3700 किलोमीटर तक मारक क्षमता। 
  • 1 मिनट में 60,000 फुट की ऊंचाई और 4.5 जेनरेशन के ट्विन इंजन से लैस। 
  • 75 फीसदी विमान हमेशा ऑपरेशन के लिए तैयार हैं, परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। 
  • राफेल को अफगानिस्तान, लीबिया, माली और इराक में इस्तेमाल किया जा चुका है।

सरकार और दसॉल्ट के बीच क्या है करार

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2015 में घोषणा की थी कि भारत फ्रांसीसी विमान निर्माता कंपनी से 36 राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदेगा। इसके बाद सितंबर 2016 में भारत ने 7.87 बिलियन यूरो (करीब 58,000 करोड़ रुपये) में 36 नए राफले लड़ाकू जेट खरीदने के लिए फ्रांसीसी सरकार के साथ सीधा सौदा किया।

राफेल को 2012 में संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप और रूस से प्रतिद्वंद्वी प्रस्तावों पर चुना गया था। मूल योजना यह थी कि भारत फ्रांस से 18 ऑफ द शेल्फ जेट खरीदेगा। मोदी सरकार ने पिछली यूपीए सरकार की 126 राफेल खरीदने की प्रतिबद्धता से पीछे हटकर कहा कि डबल इंजन वाले विमान बहुत महंगे होंगे और यह समझौता भारत और फ्रांस के बीच लगभग एक दशक लंबी वार्ता के बाद हुआ।
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कतर से भिन्न होगा भारतीय राफेल

राफेल लड़ाकू विमान (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि अगर पाकिस्तानी पायलटों ने राफेल को उड़ाया है तो यह भारत के लिए चिंता की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि कतर को जो लड़ाकू विमान दिए गए हैं उनसे भारत को मिलने वाले विमानों की तकनीकी अलग है। हालांकि दोनों विमानों में राडार सहित कई तकनीकी समान ही है।

भारत को अपना पहला राफेल विमान सितंबर में मिलने की संभावना जताई जा रही है। दो इंजन राफेल लड़ाकू जेट को शुरुआत से ही एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड अटैक के लिए बहु-भूमिका सेनानी के रूप में डिजाइन किया गया है, परमाणु रूप से सक्षम है और इसका पुनर्निर्माण भी किया जा सकता है। तकनीक में उन्नत यह विमान हवाई टोही, ग्राउंड सपोर्ट, इन डेप्थ स्ट्राइक, एंटी-शर्प स्ट्राइक और परमाणु अभियानों को अंजाम देने में दक्ष है। इसमें मल्टी मोज रडार लगे हैं।

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