फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Waqf Law: दारुल उलूम देवबंद ने वक्फ अधिनियम में बदलाव का किया विरोध, जेपीसी अध्यक्ष ने विचार करने की कही बात

Wed, 11 Dec 2024 10:31 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

दारुल उलूम देवबंद ने बुधवार को विधेयक की जांच कर रही संसदीय समिति के साथ बैठक के दौरान मौजूदा वक्फ कानून में प्रस्तावित बदलावों का विरोध किया। दारुल उलूम देवबंद के प्रिंसिपल मौलाना अरशद मदनी ने भाजपा सदस्य जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली वक्फ संशोधन विधेयक पर संयुक्त समिति के समक्ष पेश होकर मौजूदा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की भी जोरदार वकालत की।
विज्ञापन
मौलाना अरशद मदनी, दारुल उलूम देवबंद के प्रिंसिपल - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत के सबसे पुराने इस्लामी मदरसे दारुल उलूम देवबंद ने बुधवार को विधेयक की जांच कर रही संसदीय समिति के साथ बैठक के दौरान मौजूदा वक्फ कानून में प्रस्तावित बदलावों का विरोध किया। दारुल उलूम देवबंद के प्रिंसिपल मौलाना अरशद मदनी ने भाजपा सदस्य जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली वक्फ संशोधन विधेयक पर संयुक्त समिति के समक्ष पेश होकर मौजूदा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की भी जोरदार वकालत की। अरशद मदनी ने समिति से कहा कि किसी कानून को केवल इस बहाने नहीं बदला जाना चाहिए कि उसे प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया। 
विज्ञापन


संसदीय सूत्रों ने कहा कि कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना प्रशासकों की जिम्मेदारी है। सूत्रों ने कहा कि मदरसा प्रमुख ने सभी धार्मिक संस्थानों के शासन और प्रशासनिक मामलों में समानता का समर्थन किया।

दारुल उलूम देवबंद ने भी दिए सुझाव- जगदंबिका पाल
वहीं जगदंबिका पाल ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, 'दारुल उलूम देवबंद आज की बैठक में आया था। हमने उन्हें इसलिए बुलाया क्योंकि दारुल उलूम देवबंद करीब 150 साल पुराना है। हमने प्रस्तावित संशोधन विधेयक के बारे में उनके विचार, उनके सुझाव लिए हैं। उन्होंने इसे लिखित रूप में भी दिया है। जेपीसी इस पर विचार करेगी।' 
विज्ञापन


मदरसा के कुलपति अबुल कासिम नोमानी भी रहे मौजूद 
सूत्रों ने बताया कि अरशद मदनी ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन विधेयक में मौजूदा कानून की धारा 40, 104, 107, 108 और 108ए को हटाया जाना वक्फ के हित के खिलाफ है। मदरसा के कुलपति अबुल कासिम नोमानी भी समिति के समक्ष उपस्थित हुए। वक्फ अधिनियम की धारा 104 उन लोगों की तरफ से दी गई या दान की गई संपत्तियों से संबंधित है जो इस्लाम को नहीं मानते या कुछ वक्फ का समर्थन नहीं करते। 

धारा 107 में कहा गया है कि सीमा अधिनियम-193 के प्रावधान किसी भी वक्फ में अचल संपत्ति के कब्जे के लिए किसी भी मुकदमे पर लागू नहीं होंगे। धारा 108 में कहा गया है कि वक्फ अधिनियम देश में किसी भी निष्क्रांत संपत्ति पर लागू माना जाएगा। धारा 108ए में कहा गया है कि यदि किसी अन्य कानून के साथ असंगतताएं हैं तो वक्फ अधिनियम का प्रभाव सर्वोपरि होगा। धारा 40 किसी भी संपत्ति को वक्फ संपत्ति के रूप में निर्धारित करने से संबंधित है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें