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दुर्गा पूजा पर दार्जिलिंग टॉय ट्रेन का रोमांच: पर्यटकों के लिए छह नई जॉयराइड सेवाएं, आज ही बुक करें टिकट

Thu, 27 Aug 2026 12:18 AM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी।

सार

दुर्गा पूजा की छुट्टियों में अगर आप भी पहाड़ों की रानी दार्जिलिंग का रुख कर रहे हैं, तो हरी-भरी वादियों, भाप इंजन की ऐतिहासिक सीटी और रवींद्रनाथ टैगोर की यादों से सजी यह टॉय ट्रेन यात्रा आपके उत्सव के मजे को दोगुना करने के लिए पूरी तरह तैयार है!
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टॉय ट्रेन - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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दुर्गा पूजा के दौरान दार्जिलिंग घूमने वाले पर्यटकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अंतर्गत आने वाले दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे ने छह नई जॉयराइड सेवाएं शुरू करने का फैसला लिया है। यह शुरुआत एक अक्तूबर से होने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य त्योहारों के मौसम में आने वाले सैलानियों को ऐतिहासिक रेल यात्रा का अनूठा आनंद देना है। इसके जरिए लोग हिमालय के प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को बेहद करीब से महसूस कर सकेंगे।
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दार्जिलिंग और कार्सियांग के बीच सफर
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, दार्जिलिंग और घूम के बीच चार एकतरफा सेवाएं चलाई जाएंगी। दार्जिलिंग से सुबह नौ बजकर बीस मिनट और ग्यारह बजकर पच्चीस मिनट पर ट्रेनें रवाना होंगी। घूम से वापसी की सेवाएं सुबह दस बजकर पच्चीस मिनट और दोपहर बारह बजकर तीस मिनट पर उपलब्ध रहेंगी। ये चारों गाड़ियां डीजल इंजन से चलेंगी और इनका किराया आठ सौ रुपये रखा गया है। इसके अलावा कार्सियांग और महानदी के बीच दो विशेष ट्रेनें भी चलाई जाएंगी।
  • कार्सियांग से महानदी के बीच 'रेड पांडा' सेवा भाप इंजन से चलेगी और इसका किराया 1,530 रुपये रहेगा।
  • कार्सियांग-महानदी रूट पर डीजल इंजन से चलने वाली 'मुक्त धारा' सेवा का किराया 1,030 रुपये तय हुआ है।
  • दार्जिलिंग और घूम के बीच डीजल इंजन वाली चार एकतरफा सेवाओं का प्रति यात्री किराया 800 रुपये रखा गया है।
  • 'मुक्त धारा' ट्रेन का नाम प्रसिद्ध कवि रवींद्रनाथ टैगोर की साहित्यिक रचना से प्रेरित होकर रखा गया है।
  • नियमित परिचालन से पहले सितंबर के अंत में महानदी स्टेशन पर 'मुक्त धारा' का विशेष परिचालन किया जाएगा।

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सांस्कृतिक धरोहर और पर्यटन को बढ़ावा
'मुक्त धारा' ट्रेन का नाम रवींद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध रचना के आधार पर चुना गया है, जो पगलाझोरा क्षेत्र की सुंदरता से गहराई से जुड़ी है। यह रेल यात्रा साहित्य और संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगी। रेलवे को उम्मीद है कि इस पहल से इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और प्रचार-प्रसार को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही पर्वतीय क्षेत्र में पर्यटन उद्योग को भी बड़ा फायदा पहुंचेगा।
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