खाद संकट पर मध्य प्रदेश के किसान संगठनों का कहना है कि,सरकारी खाद गुपचुप तरीके से व्यापारियों को दे दिया जाता है। फिर यही व्यापारी इसे ब्लैक में 2000 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से बेचते हैं। इससे किसान ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। आज किसानों को फसलों की बुवाई के लिए समय पर खाद न मिलने से उनकी खेती प्रभावित हो रही है। अगर समय पर बुवाई नहीं हुई तो उनकी फसल अच्छी नहीं होगी। इससे उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाएगा।
नौ हजार विक्रय केंद्र फिर भी किसान है परेशान
मध्यप्रदेश के किसान नेता राहुल राज ने अमर उजाला से चर्चा में कहा कि, मध्यप्रदेश साढ़े चार हजार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति और राज्य सहकारी विपणन संघ के पांच सौ विक्रय केंद्रों से खाद किसानों को उपलब्ध कराई जाती है। निजी विक्रेताओं को मिला लिया जाए तो कुल नौ हजार विक्रय केंद्र होते हैं लेकिन यह संख्या भी कम है। सरकार को इस दिशा में कदम उठाने की जरूरत है। आज किसान खाद पाने के लिए अपने दस्तावेज और कूपन लेकर लंबी-लंबी लाइनों में खड़े होते हैं। सुबह से शाम तक इंतजार करने के बाद भी जब उन्हें खाद नहीं मिलता तो वे निराश होकर खाली हाथ घर लौट जाते हैं। हमारी प्रशासन से अपील की है कि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। उन्हें समय पर खाद मिले ताकि वे अपनी फसल की बुवाई सही समय पर कर सकें और आर्थिक संकट से बच सकें।
राज का कहना है कि, किसान पुत्र केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान चौहान के गृह प्रदेश में ये हाल तो अन्य राज्यों के क्या हाल होगे ? आज खाद का संकट प्रदेश के हिस्से में नहीं है बल्कि बुंदेलखंड, जबलपुर, ग्वालियर-चंबल और मालवा-निमाड़ संभाग में भी है। फसल बुवाई का समय निकलता जा रहा है और किसान को अब तक खाद नहीं मिल पा रही है। जबकि हम किसान भाईयों ने सरकार से तीन माह पहले खाद की उपलब्धता को लेकर मांग की थी। सरकार दावा कर रही है कि पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है, लेकिन यह सोसायटियों में नहीं, बल्कि निजी दुकानों पर दिखाई दे रही है। आज सरकार के मिलीभगत से खाद की कालाबाजारी हो रही है। यदि अगले कुछ दिनों में हालात नहीं सुधरे तो सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा। दरअसल धान की कटाई के बाद अब गेहूं और मटर की बुआई शुरू हो गई है।ऐसे में किसानों को सबसे ज्यादा जरूरत डीएपी खाद की है।
डिफाल्टर किसानों को नहीं मिल रही खाद
सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि, सहकारी समितियों से केवल उन सदस्यों को खाद उपलब्ध कराती है जो अपना ऋण नियमित चुकाते हैं। डिफाल्टर किसानों को खाद नहीं मिलती है। इन्हें आवश्यकता की खाद मिल जाए, इसके लिए नकद विक्रय केंद्रों से आपूर्ति की जाती है। इन्हें राज्य सहकारी विपणन संघ संचालित करता है। भीड़ भी यहीं लगती है क्योंकि किसान अधिक मात्रा में खाद चाहते हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले सीजन में 34 लाख टन यूरिया बेचा था। अभी तक 25 लाख टन यूरिया खरीफ और रबी सीजन में विक्रय हो चुका है। करीब पांच लाख टन यूरिया उपलब्ध है। डीएपी और एनपीके अवश्य कम मिला है। पिछले साल अभी तक 20 लाख टन डीएपी और एनपीके किसानों को उपलब्ध कराया गया था। अभी तक 14 लाख टन की आपूर्ति हो चुकी है। डेढ़ लाख टन नवंबर अंत तक डीएपी और एनपीके और आ जाएगा।