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15 साल पुराना केस निर्दलीय सांसद के लिए बना मुसीबत: कोर्ट ने सुनाई दो साल की सजा; क्या छिन जाएगी सांसदी?

Sat, 01 Aug 2026 09:27 PM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

दमन और दीव के निर्दलीय सांसद उमेश पटेल और पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुरेश पटेल को 2011 में सरकारी भर्ती प्रक्रिया के दौरान सरकारी कामकाज में बाधा डालने के मामले में अदालत ने दो-दो साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि, अपील का अवसर देने के लिए अदालत ने सजा पर एक महीने की रोक लगा दी है।
 
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उमेश पटेल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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दमन और दीव से निर्दलीय लोकसभा सांसद उमेश पटेल और उनके सह-आरोपी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुरेश पटेल को वर्ष 2011 के एक मामले में सरकारी अधिकारियों के कामकाज में बाधा डालने का दोषी ठहराते हुए अदालत ने दो-दो साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है।

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क्या फैसला सुनाया अदालत ने?
केंद्र शासित प्रदेश दमन, दीव और दादरा एवं नगर हवेली के दमन स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रणिता भारसकड़े-वाघ की अदालत ने शनिवार को उमेश पटेल और सुरेश पटेल को दोषी करार देते हुए दो-दो साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। हालांकि अदालत ने दोनों को उच्च अदालत में अपील दायर करने का अवसर देने के लिए सजा पर एक महीने के लिए रोक लगा दी है।

किन धाराओं में दोषी ठहराया गया?
अदालत ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 186 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकना) और धारा 353 (लोक सेवक के विरुद्ध आपराधिक बल का प्रयोग) के तहत दोषी पाया। वहीं, अदालत ने उन्हें आईपीसी की धारा 332 (लोक सेवक को चोट पहुंचाना), धारा 452 (अनधिकृत प्रवेश) और धारा 504 (जानबूझकर अपमान करना) के आरोपों से बरी कर दिया।
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क्या था पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला 12 मार्च 2011 का है। उस दिन मोती दमन स्थित फुटबॉल मैदान में आबकारी उपनिरीक्षक (एक्साइज सब-इंस्पेक्टर) पद के लिए भर्ती प्रक्रिया चल रही थी। आरोप है कि उमेश पटेल और सुरेश पटेल भर्ती स्थल में जबरन प्रवेश कर गए और वहां ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को धक्का दिया। इसके बाद वे उस स्थान तक पहुंच गए, जहां उपनिरीक्षकों के साक्षात्कार चल रहे थे, और वहां मौजूद अधिकारियों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया, जिससे सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न हुई।

शिकायत किसने दर्ज कराई थी?
इस मामले की शिकायत तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगमोहेन्द्र सिंह ने दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दोनों आरोपियों ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया, जिससे लोक सेवकों के आधिकारिक कार्य में व्यवधान उत्पन्न हुआ।

सुनवाई के बाद अदालत ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने शनिवार को दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए दो-दो साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

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क्या छिन जाएगी सांसदी?
उमेश पटेल ने 2024 के लोकसभा चुनाव में दमन और दीव सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीन बार के सांसद रहे लालू पटेल को हराकर यह सीट अपने नाम की थी। हालांकि भारतीय कानून के मुताबिक, अगर किसी सांसद-विधायक को दो वर्ष की जेल होती है तो उसकी चुनाव रद्द हो जाता है। इस हिसाब से पटेल की सांसदी भी छिन सकती है।

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