तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने बुधवार को विवादित बयान दिया था। अपने बयान में उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेहरू और जिन्ना पर अपने विचार रखे थे और चीन के साथ अपने रिश्ते पर भी बेबाकी से बात की थी। पणजी में एक कार्यक्रम के दौरान नेहरू-जिन्ना पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि महात्मा गांधी चाहते थे कि मोहम्मद अली जिन्ना देश के शीर्ष पद पर बैठें, लेकिन पहला प्रधानमंत्री बनने के लिए जवाहरलाल नेहरू ने ‘आत्म केंद्रित रवैया’ अपनाया और मना कर दिया।
दलाई लामा के इस बयान पर काफी विवाद हुआ था। जिसके बाद उन्होंने इसके लिए माफी मांग ली है। उन्होंने कहा कि मेरे बयान की वजह से विवाद हुआ। यदि मैंने कुछ गलत कहा तो मैं उसके लिए माफी मांगता हूं। बता दें कि उन्होंने दावा किया था कि यदि महात्मा गांधी की जिन्ना को पहला प्रधानमंत्री बनाने की इच्छा को अमल में लाया गया होता तो भारत का बंटवारा नहीं होता। ‘मुझे लगता है कि स्वयं को प्रधानमंत्री के रूप में देखना पंडित नेहरू का आत्म केंद्रित रवैया था। यदि महात्मा गांधी की सोच को स्वीकार किया गया होता तो भारत और पाकिस्तान एक होते।’
उन्होंने कहा था, ‘मैं
पंडित नेहरू को बहुत अच्छी तरह जानता हूं, वह बेहद अनुभवी और बुद्धिमान व्यक्ति थे, लेकिन कभी-कभी गलतियां हो जाती हैं।’ जिंदगी में सबसे बड़े भय का सामना करने के सवाल पर 84 साल के धर्मगुरू ने उस दिन को याद किया जब उन्हें उनके समर्थकों के साथ तिब्बत से निष्कासित कर दिया गया था। उन्होंने याद किया कि कैसे तिब्बत और चीन के बीच समस्या बदतर होती जा रही थी। चीन के अधिकारियों का रवैया दिन ब दिन अधिक आक्रामक होती गईं।