दलाईलामा ने करीब आधे घंटे के अपने संबोधन में मौजूदा हालात के संदर्भ में बौद्ध दर्शन व मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तिब्बत के वर्तमान हालात को देखने के लिए एक व्यापक सोच और साहस की जरूरत है।
तिब्बती बाैद्ध धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि तिब्बत संकट को बौद्ध दर्शन के केंद्रीय मूल्यों करुणा, ज्ञान और ध्यान के माध्यम से देखने व समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ये तीन मूल्य भगवान बुद्ध की शिक्षा के अभिन्न अंग हैं। दलाईलामा ने दिल्ली में शुक्रवार को वैश्विक बौद्ध सम्मेलन में दूसरे दिन बौद्ध भिक्षुओं को संबोधित किया।
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दलाईलामा ने करीब आधे घंटे के अपने संबोधन में मौजूदा हालात के संदर्भ में बौद्ध दर्शन व मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तिब्बत के वर्तमान हालात को देखने के लिए एक व्यापक सोच और साहस की जरूरत है। बुद्ध की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए तिब्बती नेता ने कहा, सब कुछ एक-दूसरे पर पारस्परिक रूप से निर्भर है। प्रकृति में अलगाव नहीं है। उन्होंने कहा, आपके दैनिक जीवन में भी ऐसी समस्याएं हो सकती हैं, जो बड़ी और असहनीय लग सकती हैं।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। अपनी तरह का पहला सम्मेलन वीरवार को पीएम नरेंद्र मोदी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करने के साथ शुरू हुआ। मोदी ने कहा था कि दुनिया युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, आतंकवाद, धार्मिक अतिवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से जूझ रही है और भगवान बुद्ध के विचार इन समस्याओं का समाधान सुझाते हैं।