सरकार की तरफ से 1000-500 रुपये के नोटों का चलन बंद करने के बाद दिल्ली व एनसीआर के दिहाड़ी (दैनिक) मजदूर पलायन की तैयारी में हैं। इन कामगारों की मजबूरी यह है कि अब इन्हें काम मिलना बंद हो गया है और उनके पास 1,000-500 रुपये के रूप में जो पूंजी जमा है, उसे ये कामगार बैंक से भी नहीं बदल पा रहे हैं। एटीएम इनके पास नहीं होता है। थोक बाजार व रियल एस्टेट क्षेत्र में काम बिल्कुल बंद हो गया है, जहां ये कामगार रोजाना के हिसाब से काम करते थे।
कामगारों को काम मिलना बंद हो गया है
नया बाजार के कारोबारी टिल्लू गुप्ता ने बताया कि सदर बाजार इलाके में स्थित विभिन्न बाजारों के साथ करोल बाग, कश्मीरी गेट जैसे बड़े बाजारों में सैकड़ों की संख्या में दिहाड़ी मजदूर काम करते हैं, जो स्थायी रूप से किसी दुकान में काम नहीं करते हैं, लेकिन उन्हें रोज कोई-न-कोई काम मिल जाता है। गत मंगलवार को नोटबंदी के एलान के बाद सभी बाजारों के कारोबार में नाममात्र का काम रह गया है। पिछले कई दिनों से ये दिहाड़ी मजदूर बाजार तो आ रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई काम नहीं मिल रहा है।