भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा का दावा है कि भारतीय जनता पार्टी 2024 चुनावों को लेकर डरी हुई है। भाजपा आने वाले वक्त में विपक्षी एकता के नए समीकरणों से आशंकित है और इसी घबराहट में भाजपा और संघ परिवार मुसलमानों को अपने साथ जोड़ने के लिए बेचैन नजर आ रहे हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत जिस तरह पहली बार मुसलमानों के बीच जाकर उनकी तारीफें बटोर रहे हैं, उसे मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग समझ रहा है।
अमर उजाला के साथ बातचीत में डी राजा कहते हैं कि आज परिस्थितियां बहुत बदली हुई हैं। नई परिस्थितियों में जनता के भीतर संघ परिवार और भाजपा के प्रति गुस्सा है। जिस तरह भाजपा सरकार ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे को खत्म करने का चक्रव्यूह रचा है और हर संवैधानिक संस्था पर संघ परिवार का कब्जा हो रहा है, वह बेहद खतरनाक है। इसे जनता समझ रही है। आने वाले वक्त में क्षेत्रीय दलों, वामपंथी गठबंधन और मध्यमार्गी पार्टियों के बीच एक न्यूनतम साझा समझदारी के साथ जो तालमेल होने वाला है, उसके साफ संकेत मिलने लगे हैं।
डी राजा को लगता है कि जिस तरह नीतीश कुमार ने भाजपा से अलग होकर संकेत दे दिया है, जिस तरह डीएमके ने अपना नजरिया मजबूती से साफ कर दिया है, केसीआर ने भी अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। लगभग सभी विपक्षी दल ये मानते हैं कि इस समय पहली प्राथमिकता भाजपा और संघ परिवार को सत्ता से हटाना है। राजा कहते हैं कि अगले चुनाव में मोदी को हर हाल में हराना है ताकि देश का लोकतांत्रिक स्वरूप बचा रहे, सांप्रदायिक सद्भाव की हमारी संस्कृति बरकरार रह पाए इसके लिए हमें एक मंच पर आना ही होगा। भाकपा की 24वीं कांग्रेस 14 से 18 अक्तूबर को विजयवाड़ा में होने जा रही है जिसमें पहले दिन हमने सभी पार्टियों को आमंत्रित किया है ताकि किसी न किसी न्यूनतम साझा कार्यक्रम को लेकर सब एक हों।
कम्युनिस्टों के खिलाफ संघ परिवार के प्रचार और उन्हें देश की सियासत के हाशिए पर बताने की कोशिश को डी राजा सही नहीं मानते। उनका दावा है कि पार्टी पहले से ज्यादा मजबूत हुई है और खासकर नई पीढ़ी में वामपंथी विचारधारा और देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बचाने को लेकर जबरदस्त जागरूकता देखने को मिल रही है। उन्होंने बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पांडिचेरी और दक्षिणी राज्यों की कई तस्वीरें दिखाईं और बताया कि युवाओं में जबरदस्त जोश है और हमारी ताकत बढ़ रही है। बेशक लोकसभा या विधानसभाओं में हमारी ताकत कम दिख रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर देश के हर हिस्से में हमारा नया दस्ता मजबूती के साथ उभर रहा है। मीडिया में खबरें भले ही न आती हों लेकिन देश के कई हिस्से में वामपंथी आंदोलन तेज हुआ है।
डी राजा कांग्रेस से भी अपील करते हैं कि वह सबसे पुरानी और राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते विपक्ष के एक बड़े और मजबूत गठबंधन का अहम हिस्सा बने। सभी विपक्षी दल आपसी हितों को दरकिनार कर जल्दी से जल्दी एक बड़े गठबंधन में आएं और भाजपा-संघ की खतरनाक राजनीति के खिलाफ बड़ा मोर्चा बनाएं।
डी राजा 2019 में भाकपा के महासचिव बनाए गए हैं, लेकिन तब से कोरोना काल की वजह से पार्टी को मजबूती देने का काम खुलकर नहीं हो पाया है। हालांकि, वो लगातार हर राज्य का दौरा कर रहे हैं, पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं और खासकर छात्रों, युवाओं, महिलाओं और किसानों के बीच काफी काम कर रहे हैं।
दूसरी तरफ पार्टी के सचिव अतुल कुमार अंजान भी किसानों के आंदोलनों के साथ मजदूरों के बीच पार्टी की ताकत बढ़ाने का काम कर रहे हैं। अतुल अंजान जहां यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल के लगातार दौरे कर रहे हैं, वहीं राजा ने केरल और दक्षिण भारत के अलावा अन्य राज्यों में पार्टी के कामकाज को बढ़ाने की कोशिश में लगे हैं।
लंबे समय से दिल्ली के पार्टी मुख्यालय अजय भवन में हलचलें कम थीं, लेकिन अब यहां भी लगातार देश के हर कोने से पार्टी के कामकाज की रिपोर्ट आ रही है और फिलहाल पार्टी कांग्रेस की तैयारी में भाकपा से जुड़े सभी संगठन भी जुटे हैं। हर प्रदेश में पार्टी सम्मेलन हो रहे हैं और लंबे समय बाद पार्टी के वृहद कांग्रेस को लेकर नई ऊर्जा के साथ रणनीतियां बन रही हैं।