वैज्ञानिक अध्ययन से खुलासा हुआ है कि कोरोना संक्रमण के खिलाफ काम करने वाले साइटोकाइन प्रोटीन बाद में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी के लिए खतरा साबित होता है। चीन के आर्मी मेडिकल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के अनुसार, कोरोना मरीजों के इम्यन सिस्टम की कोशिकाएं घटने से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और व्यक्ति की हालत गंभीर हो जाती है। जर्नल फ्रंटियर इन इम्युनोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, शरीर में टी सेल्स सफेद रक्त कोशिकाओं जैसी होती हैं।
वैज्ञानिकों का दावा है कि इलाज के दौरान डॉक्टरों को टी-सेल कोशिका पर भी ध्यान देना होगा, जैसा अभी तक नहीं हो रहा है और श्वास प्रणाली के इलाज पर जोर दिया जा रहा है। प्रमुख शोधकर्ता योंगवेन चेन का कहना है कि जिन मरीजों पर अधिक ध्यान देना होगा, जिनमें टी कोशिका की कमी है। ये कोशिका शुरुआती स्तर पर वायरल संक्रमण के खिलाफ काम करती है। खास बात ये है कि इस वक्त एंटीबॉडीज भी नहीं बनी होती हैं।
वैज्ञानिकों ने 522 मरीजों पर ये अध्ययन किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि टी-कोशिका के जरिए रोग की गंभीरता का पता लगाया जा सकता है। इससे नई दवा भी बनाने में मदद मिलेगी जो टी-कोशिका की संख्या बढ़ाने के साथ उसकी कार्यक्षमता भी बढ़ाएगी।