असली गुनहगार को बचा रही ठाकरे सरकार: भाजपा
ताउते तूफान में पी-305 बार्ज डूबने से 61 लोगों की मौत के बाद महाराष्ट्र में सत्ताधारी और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। राज्य की तीन दलों की सरकार ने इस हादसे के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा है। वहीं, भाजपा विधायक व पूर्वमंत्री आशीष शेलार ने पलटवार करते हुए शनिवार को कहा, राज्य सरकार असली गुनहगार को बचा रही है।
शेलार ने कहा, राज्य सरकार एफकॉन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी को बचा रही है। कैप्टन राकेश बल्लभ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले को रफादफा किया जा रहा है। ताउते का अलर्ट 11 मई को जारी हुआ था। एफकॉन्स ने 10 मई को ही ओएनजीसी को पत्र लिखकर 15 जून तक समुद्र में काम करने की अनुमति मांगी थी।
नेवल सिक्यूरिटी सर्टिफिकेट (एनएससी) डिफेंस और ओएनजीसी ने इसकी इजाजत नहीं दी और उन्हें वापस लौटने का निर्देश दिया था। वैसे भी, समुद्र में काम करने वाले सभी जहाजों को हर साल 15 मई से पहले वापस लौटना होता है।
इसके बावजूद एफकॉन्स वापस नहीं हुई। शेलार ने कहा, पुलिस ने बार्ज के कप्तान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है जो खुद समुद्र में लापता हैं। ऐसे में घटना की तफ्तीश और पीड़ितों को न्याय कैसे मिलेगा। इस हादसे के लिए एफकॉन्स के मालिक शापूर पालनजी के खिलाफ तत्काल गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर कंपनी को काली सूची में डाला जाना चाहिए।
हादसे के लिए ओएनजीसी जिम्मेदार, प्रधान इस्तीफा दें: शिवसेना
शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने पापा-305 बार्ज के डूबने के लिए ओएनजीसी को जिम्मेदार बताते हुए पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा, ताउते की सूचना पूरे देश को थी। ऐसे में क्या इसकी जानकारी ओएनजीसी को नहीं थी। लेकिन बार्ज पर काम करने वाले कर्मचारियों का जीवन खतरे में डाला गया।
इसके हादसे के लिए जिम्मेदार ओएनजीसी के निदेशक और महाप्रबंधक के खिलाफ गैरइरादतन का हत्या दर्ज होना चाहिए। शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र की संपादकीय में इस पूरी घटना को ‘समुद्र में नरसंहार’ बताते हुए पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की है।
ताउते से हुई मौतों को गंभीरता से लेते हुए कैबिनेट सचिव राजीव गाबा ने शनिवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति के साथ बैठक कर यास से निपटने की तैयारियों पर चर्चा की।
उन्होंने बंगाल और ओडिशा सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि 26 मई से पहले सभी नावें व जहाज तट पर लौट आए। साथ ही खतरे वाले इलाकों से सभी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया जाए।
कोरोना महामारी को लेकर भी उन्होंने सतर्क रहने के निर्देश दिए और अस्पतालों व कोरोना से जुड़े बुनियादी ढांचे को बचाने के प्रयास करने का सुझाव दिया। गाबा ने केंद्र व राज्यों की तैयारियों का जायजा लेते हुए जोर दिया कि समय पर सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं ताकि कम से कम नुकसान हो और ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाया जा सके।
इसके अलावा बिजली, दूर संचार समेत अन्य आवश्यक सेवाओं को बहाल रखने पर भी जोर दिया। बैठक में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, अंडमान निकोबार और पुडुचेरी के मुख्य सचिव व गृह, ऊर्जा, जहाजरानी, पेट्रोलियम, दूरसंचार, उड्डयन मंत्रालय के सचिव और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, तटरक्षक, एनडीआरएफ और मौसम विभाग के महानिदेशकों ने हिस्सा लिया।
एनडीआरएफ की 65 टीमें तैनात, 20 स्टैंडबाय पर
यास से निपटने के लिए एनडीआरएफ ने 65 टीमों को दोनों राज्यों के तटीय इलाकों में तैनात कर दिया है। वहीं 50 अतिरिक्त टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है। इसके अलावा सेना, नौसेना और भारतीय तटरक्षक भी अलर्ट हैं।