ओडिशा के तटीय जिलो में शुक्रवार को फैनी तूफान ने अपना कहर बरपाया लेकिन भारतीय मौसम विभाग की चेतावनी प्रणाली में आए सुधार की वजह से लाखों लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया। केंद्र-राज्य के बीच बेहतर समन्वय और भारी मात्रा में एनडीआरएफ की तैनाती ने मृतकों की संख्या को काफी सीमित कर दिया।
जनवरी में बांग्लादेश ने इस तूफान का नामकरण किया था। तभी से मौसम विभाग स्वयंसेवी संस्थाओं के जरिए लोगों को इसके लिए जागरूक कर रहा था। फरवरी से रेडक्रॉस और क्रीसेंट सोसाइटी तटीय क्षेत्रों में बसे लोगों को प्लास्टिक और बांस से घर बनाने की सलाह दे रहे थे।
20 साल की तैयारी
ओडिशा में संपत्ति का नुकसान तो हुआ पर लोगों पर इसका असर नहीं हुआ। इसकी बड़ी वजह थी ओडिशा सरकार की पहले से तैयारी। ओडिशा के स्पेशल रिलीफ कमिश्नर विष्णु पद सेठी ने बताया कि 1999 में रेड क्रॉस के 23 साइक्लोन शेल्टर थे जिनमें 42 हजार लोगों को आश्रय मिला था। उससे हमें साइक्लोन शेल्टर निर्मित करने की प्रेरणा मिली। यह ध्यान रखा गया कि गांववालों को शेल्टर तक पहुंचने के लिए सवा दो किमी से ज्यादा न चलना पड़े। आज राज्य में 879 मल्टीपरपज साइक्लोन शेल्टर हैं। ये शेल्टर गोल खंभों पर खड़े हैं। भूतल खाली रहता है ताकि तेज हवा आसानी से निकल जाए और खंभे जमीन के नीचे भी 40 फीट तक गहरे होते हैं। यह भवन 300 किमी प्रति घंटे की हवा झेल सकता है।
तटीय क्षेत्रों में एनडीआरएफ के जवान तीन पहले ही पहुंच गए थे और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील कर रहे थे। मौसम विभाग रेडियो और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को चक्रवात की चेतावनी और जरूरी सावधानियों के बारे में बता रहे थे।
तूफान से पहले तटीय इलाकों के लिए केंद्र सरकार ने आपदा फंड से लगभग 1400 करोड़ रुपये जारी किए थे। भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना और तटरक्षक बल की स्थानीय टुकड़ियों को पांच दिन पहले से अलर्ट कर दिया गया था। तटीय राज्यों में नौसेना ने 10 से ज्यादा जहाजों की तैनाती की थी।