मंजुला ने बताया कि पहले भी तूफान ने ही उनकी जिंदगी को बदल दिया था। चक्रवात आइला की वजह से खेत बर्बाद हो गए तो मजबूरन पति को मछली पकड़ने का काम शुरू करना पड़ा। इसी दौरान बाघ ने हमला कर उनकी जान ले ली। काफी संघर्ष के बाद एक एनजीओ की मदद से मछली पालन के लिए एक तालाब के इस्तेमाल की अनुमति मिली थी। अब अम्फान तूफान को भी ले गया।
मंजुला जैसी कई कहानी
गोसाबा इलाके के सतजेलिया प्रखंड की 100 से ज्यादा ‘बाघ विधवाओं’ ने बीते 15 वर्षों में अपने पतियों को बाघ की वजह से खो दिया और इन सबकी कहानी कमोबेश एक जैसी है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक सुंदरबन इलाके में 2010 से 2017 के बीच बाघ के हमलों में कम से कम 52 लोगों की जान गई है। शीबा सरदार (40) सतजेलिया की रहने वाली एक अन्य बाघ विधवा हैं। उसे चक्रवात या इंसान-बाघ के संघर्ष से ज्यादा भूख का डर है। वह मुर्गी पालन का काम करती थी। तूफान में 100 मुर्गियां और 80 चूजे बह गए। वह बताती है कि सुंदरबन में जब भी कोई आपदा आती है तो हमें फिर से नई शुरुआत करनी पड़ती है।
खेतिहर मजदूर सुलाता का कहना है कि आइला चक्रवात के बाद चीजे पटरी पर लौटना शुरू हुई ही थीं कि अम्फान तूफान ने सब कुछ खत्म कर दिया। उसने कहा, 'अब हमें सब कुछ नए सिरे से शुरू करना होगा। कोई खेती योग्य जमीन नहीं बची और मेरे पास परिवार को पालने के लिये कोई जरिया नहीं है।' सुलाता के पति को 2011 में उसकी आंखों के सामने ही बाघ ने मार दिया था। वह बताती हैं कि बाघ, घड़ियाल और सांप के हमले में अपने पति को खोने वाली बहुत सी महिलाओं ने शहर का रुख कर लिया और वहां काम तलाश लिया। संपर्क किए जाने पर पश्चिम बंगाल सुंदरबन मामलों के मंत्री मंटुराम पखीरा ने कहा कि सरकार सुंदरबन की विधवाओं के मामले को देखेगी।