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साइबर अपराध: गृह मंत्रालय का बड़ा अलर्ट, बैंक और वित्तीय संस्थानों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट कर रहे हमला

Thu, 05 Nov 2026 12:47 AM IST
पवन पांडेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आई4सी और CERT-In ने बैंकों, एनबीएफसी और फिनटेक कंपनियों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से हो रहे तेज साइबर हमलों को लेकर चेतावनी जारी की है। जांच में सामने आया कि हैकर कमजोर आईटी सिस्टम और पेमेंट एपीआई को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये के अनधिकृत ट्रांजेक्शन कर रहे हैं। इसके बाद हमलावर डिजिटल रिकॉर्ड भी मिटा देते हैं।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय - फोटो : ANI
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विस्तार
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इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की 'नेशनल साइबर क्राइम थ्रेट एनालिसिस यूनिट' (NCTAU) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय की संस्था CERT-In ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) और फिनटेक कंपनियों के खिलाफ साइबर हमलों और उनसे जुड़े साइबर धोखाधड़ी के एक ट्रेंड को देखा है। ये हमले आर्थिक लाभ के लिए किए जा रहे हैं और इनमें 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' एजेंटों की मदद ली जा रही है। इसके चलते ये हमले बहुत ही तेज़ गति (मशीन की गति) से अंजाम दिए जा रहे हैं। कुछ मामलों में, फंड वितरण प्रणालियों और एपीआई के ज़रिए करोड़ों रुपयों के अनधिकृत (बिना अनुमति वाले) ट्रांजेक्शन सामने आए हैं।
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हमलावर कैसे काम करते हैं?
  • हमलावर ऐसे सॉफ्टवेयर का फायदा उठाते हैं जिन्हें अपडेट (पैच) नहीं किया गया है, या फिर ऐसे इंटरनेट-कनेक्टेड सर्वर/आईटी सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं जिन्हें गलत तरीके से कॉन्फ़िगर किया गया है। इसमें ग्राहकों की शिकायतों के लिए इस्तेमाल होने वाले इंटरफेस भी शामिल हो सकते हैं।
  • इसके बाद, हैकर स्वचालित फंड वितरण प्रणालियों या भुगतान और फंड ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष इंटरफ़ेस (एपीआई) को निशाना बनाते हैं। 'एजेंटिक एआई फ्रेमवर्क' के इस्तेमाल से ये हमले मशीन की तेज़ गति से हो पाते हैं।
  • पैसे को अलग-अलग बैंकों में मौजूद 'म्यूल' अकाउंट्स (ऐसे खाते जिनका इस्तेमाल अपराधी करते हैं) में भेजा जाता है, और फिर तुरंत आईएमपीएस /नेफ़्टी के ज़रिए वहां से निकाल लिया जाता है या कहीं और ट्रांसफर कर दिया जाता है।
  • अंत में, हमलावर रिकॉर्ड को डिलीट कर देते हैं और अपने सुराग मिटा देते हैं, ताकि मामले की जांच करना मुश्किल हो जाए।

वित्तीय संस्थानों को क्या करना चाहिए?
सभी बैंकों, एनबीएफसी, फिनटेक कंपनियों, पेमेंट एग्रीगेटर्स/गेटवे और अन्य वित्तीय संस्थाओं को सलाह दी जाती है कि वे CERT-In की एडवाइजरी CIAD-2026-0046 “BFSI संस्थाओं में अनधिकृत फंड ट्रांसफर के लिए पेमेंट और डिस्बर्समेंट एपीआई का दुरुपयोग करने वाले थ्रेट एक्टर्स” (9 अक्तूबर 2026, गंभीरता: क्रिटिकल) और CERT-In की एडवाइजरी CIAD-2026-0049 “हमले के माध्यम (अटैक वेक्टर्स) के रूप में AI एजेंट” (15 अक्तूबर 2026, गंभीरता: क्रिटिकल) में बताए गए उपायों को प्राथमिकता के आधार पर लागू करें। साथ ही, वे अपने कंट्रोल (सुरक्षा उपायों) को CERT-In के “डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में AI-आधारित कमजोरियों के जोखिम को कम करने और उनसे बचाव के लिए ब्लूप्रिंट” (मई 2026) और अपने संबंधित सेक्टर के रेगुलेटर द्वारा निर्धारित साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क के अनुरूप बनाएं।
  • किसी भी साइबर घटना का पता चलने के 6 घंटे के भीतर CERT-In को इसकी रिपोर्ट करें।
  • बैंकों और एनबीएफसी को घटना का पता चलने के 6 घंटे के भीतर आरबीआई के DAKSH पोर्टल पर रिपोर्ट करना अनिवार्य है।
  • एनबीएफसी और फिनटेक कंपनियां धोखाधड़ी वाले ट्रांजेक्शन की बल्क रिपोर्टिंग के लिए I4C से संपर्क कर सकती हैं। यह रिपोर्टिंग एनसीआरपी -सीएफ़सीआरएमएस पर की जानी चाहिए, ताकि धोखाधड़ी से निकाली गई रकम को फ्रीज (होल्ड) किया जा सके।
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सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय
  • भुगतान के लिए इस्तेमाल होने वाले सभी डिजिटल इंटरफेस (एपीआई) की एक पूरी सूची रखें और पुराने, इस्तेमाल न होने वाले या टेस्ट इंटरफेस को हटा दें या बंद कर दें।
  • बैंक की 'चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर' (सीआईएसओ) टीम, 'ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग' टीम और आईटी टीम को एपीआई हमलों के जोखिमों को पहले से कम करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
  • दैनिक और प्रति-लेनदेन सीमाएं तय करें, लाभार्थी के नाम और खातों की पुष्टि करें, और असामान्य गति से होने वाले लेन-देन पर नजर रखें।
  • बैंकों को यह जांचना चाहिए कि क्या गैर-श्वेतसूची आईपी से एनबीएफसी के 'एक्सेस टोकन' फेल हो रहे हैं।
  • घुसपैठ की किसी भी संभावित कोशिश को रोकने के लिए, ग्राहकों से जुड़े और शिकायतें प्राप्त करने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करें। अनधिकृत पहुंच को रोकने के लिए सुरक्षित आर्किटेक्चर की गहन समीक्षा की जानी चाहिए।
  • 'ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग' टीम को लेन-देन के विवरण पैटर्न, लाभार्थी प्रोफाइल या लेन-देन की मात्रा में होने वाले अचानक बदलावों पर नजर रखनी चाहिए।
  • यह सुनिश्चित करें कि जब तक सभी जरूरी जांच (जैसे केवाईसी, अप्रूवल आदि) पूरी न हो जाएं, तब तक पैसे न भेजे जा सकें।
  • 'रेड-टीम' के जरिए ऐसे अभ्यास करें जो बहुत तेज़ गति से होने वाले हमलों की नकल करते हों, और यह जांचें कि एसओसी और पेमेंट कंट्रोल सिस्टम कितनी जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं।
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