साइबर फ्रॉड का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें पीड़ित से न तो कोई ओटीपी पूछा गया, और न ही कोई एप या लिंक डाउनलोड करने के लिए कहा गया। लेकिन इसके बाद भी पीड़ित के दो बैंक खातों से एक लाख आठ हजार रूपये की निकासी हो गई। पीड़ित ने शहादरा साइबर थाने में इसकी रिपोर्ट दर्ज करा दी है, लेकिन बैंक ने अपनी कोई भी जिम्मेदारी लेने से साफ इनकार कर दिया है।
पेशे से एक मीडियाकर्मी अमोल सिंह (40 वर्ष) मंगलवार सुबह सोकर उठे ही थे कि उनके मोबाइल पर संदेश आया कि उनके आईसीआईसीआई बैंक खाते से 50 हजार रुपये निकल गए हैं। यह देखकर अमोल आश्चर्य में पड़ गए क्योंकि उन्होंने तो कोई पैसे निकाले नहीं थे, और उनका एटीएम कार्ड भी उन्हीं के पास था। जब तक अमोल अपने बैंक खाते की स्टेटमेंट चेक करते, बैंक से यह संदेश आ गया कि उनके खाते से दूसरी बार में 45 हजार रूपये निकाल लिए गए। इसके बाद एक बार दो हजार और इसके अगली बार में एक हजार रूपये निकाले गए।
इतनी देर में अमोल सिंह समझ चुके थे कि उनके साथ साइबर फ्रॉड हो गया है। लेकिन उनके लिए दोहरा झटका तब लगा जब उनके दूसरे बैंक एचडीएफसी के एक एकाउंट से भी दस हजार रूपये निकाल लिए गए। इस तरह उनके दो बैंक खातों से कुल एक लाख आठ हजार रूपये का फ्रॉड कर दिया गया।
अमोल सिंह ने अमर उजाला को बताया कि उनका मोबाइल पूरी तरह उनके पास सुरक्षित है। उनका एटीएम कार्ड भी केवल वही इस्तेमाल करते हैं और वह भी उन्हीं के पास है। उन्होंने न तो कोई लिंक डाउनलोड किया है और न ही कोई ऐसा ऐप डाउनलोड किया है जिससे कोई फ्रॉड हो सके। लेकिन इसके बाद भी उनके खातों से कुल मिलाकर एक लाख आठ हजार रूपये निकाल लिए गए।
उन्होंने बैंक से इस फ्रॉड की शिकायत की तो उनकी शिकायत पर दोनों बैंक खाते ब्लॉक कर दिए गए हैं। लेकिन दोनों ही बैंकों ने किसी भी तरह अपनी जिम्मेदारी होने से इनकार कर दिया है। पीड़ित ने पहले जगतपुरी थाने में इस घटना की सूचना दी और इसके बाद शहादरा साइबर सेल में अपने साथ हुई घटना की रिपोर्ट दर्ज करा दी है। पुलिस ने इस पर कार्रवाई करने के लिए आश्वासन दिया है।