महाराष्ट्र के नासिक से साइबर ठीक की एक बेहद ही चौंकाने वाली घटना सामने आई है। साइबर अपराधियों ने नासिक के दो वरिष्ठ नागरिकों को देश के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अदालत में वर्चुअली पेश करने की धमकी देकर 6.72 करोड़ रुपये ठग लिए। नासिक साइबर पुलिस ने सितंबर में हुई इन घटनाओं की जांच शुरू कर दी।
नासिक पुलिस ने बताया कि पीड़ित गंगापुर रोड क्षेत्र निवासी 74 वर्षीय अनिल लालसारे को अनजान नंबर से कॉल करने वाले ने बताया कि उनके आधार कार्ड से जुड़े क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया गया है। वह 72 लाख रुपये का जुर्माना नहीं भरते हैं तो उन्हें डिजिटल गिरफ्तारी के तहत मुख्य न्यायाधीश गवई की अदालत में पेश किया जाएगा। कॉल करने वाले ने धमकी भी दी कि वह पैसे नहीं देते हैं तो उन्हें सीबीआई टीम गिरफ्तार कर लेगी।
गिपफ्तारी के डर से लालासरे ने फोन करने वाले के खाते में 72 लाख रुपये जमा कर दिए।यह धोखाधड़ी 13 अक्तूबर को तब सामने आई, जब लालासरे के रिश्तेदार वृद्ध दंपती से मिलने उनके घर पहुंचे। दूसरी घटना में एक वृद्ध साइबर जालसाजों की इसी तरह की कार्यप्रणाली का शिकार हो गया।
पुलिस ने दर्ज शिकायत में कहा गया है कि उस व्यक्ति को डिजिटल गिरफ्तारी और मुख्य न्यायाधीश की अदालत में पेश करने की धमकी दी गई। उसे जालसाजों ने कहा कि तुम्हारे सिम कार्ड का इस्तेमाल अश्लील तस्वीरें और वीडियो प्रसारित करने के लिए किया गया है। डिजिटल गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने 6 करोड़ रुपये चुकाए।
सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके साइबर ठगी, सीबीआई ने तीन को गिरफ्तार किया
वहीं दूसरी ओर सीबीआई ने मंगलवार को कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में साइबर अपराधियों के एक गिरोह के खिलाफ समन्वित छापे मारकर तीन लोगों को गिरफ्तार किया। यह गिरोह सोशल मीडिया पर लोगों को ऑनलाइन निवेश योजनाओं और अंशकालिक नौकरियों का लालच देकर ठग रहा था।
सीबीआई ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की साइबर अपराध निरोधक इकाई आई4सी की एक शिकायत पर कार्रवाई की, जिसमें आरोप लगाया गया था कि हजारों भारतीयों को भ्रामक ऑनलाइन योजनाओं के जरिये करोड़ों रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। सीबीआई ने कहा कि इस गिरोह में विदेशी नागरिक भी शामिल थे और उन्होंने अपराध की आय को ठिकाने लगाने और उसे सफेद करने के लिए पूरे भारत में खासकर बंगलूरू में फर्जी कंपनियों का एक जटिल नेटवर्क बनाया।
सीबीआई के मुताबिक, ई-कॉमर्स या फिनटेक परिचालन में अंशकालिक नौकरी की आड़ में कई अनजान व्यक्तियों को धोखे से इन कंपनियों में निदेशक नियुक्त किया गया। इस गिरोह ने टेलीग्राम, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिये लोगों की भर्ती की और फर्जी प्रोफाइल और कंपनियां बनाने के लिए केवाईसी दस्तावेज एकत्र किए। इसने ऑनलाइन निवेश से उच्च रिटर्न के झूठे वादों के साथ तमाम लोगों के साथ ठगी की।