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साइबर स्पेस में 'प्रतिशोध' और 'दुख' करा रहे अपराध, खुद को शक्तिशाली मानते हैं अपराधी

Sat, 10 Oct 2020 09:24 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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साइबर क्राइम - फोटो : फाइल फोटो
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देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, एक डाटा से पता चला है कि महाराष्ट्र में महिलाओं को सोशल मीडिया पर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महाराष्ट्र में हर दिन एक महिला को सोशल मीडिया पर डराया या धमकाया जाता है।

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'नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो' द्वारा जारी नवीनतम 2019 के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में लगातार तीसरे साल महिलाओं के खिलाफ सोशल मीडिया पर साइबर स्टॉकिंग और धमकाने के सबसे अधिक मामले दर्ज हुए। पिछले तीन साल में इस तरह के 1,126 मामले दर्ज किए गए हैं। 


यहां गौर करने वाली बात यह है कि 2017 से 2019 तक भारत भर में रिपोर्ट किए गए कुल 2,051 साइबर स्टॉकिंग और धमकाने वाले मामलों में से एक-तिहाई महाराष्ट्र में रिपोर्ट किए गए। आंध्र प्रदेश 184 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। वहीं, सोशल मीडिया पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में हरियाणा 97 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।   
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मनोवैज्ञानिक निराली भाटिया के अनुसार, इसके पीछे की वजह आमतौर पर प्रतिशोध या दुख है, जो अधिकांश साइबर अपराधियों को प्रेरित करता है। उन्होंने कहा, इन अपराधों के पीछे का कारण आरोपियों द्वारा खुद को शक्तिशाली समझना है। इंटरनेट की मदद से ये लोग गुमनाम रहते हैं। 

2018 में 1,262 के मुकाबले 2019 में 1,503 मामलों के साथ महिलाओं के खिलाफ साइबर क्राइम के मामले में महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर था। एक साल के भीतर इसमें 19 फीसदी की वृद्धि हुई। वहीं, कर्नाटक में 50 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। कर्नाटक में 2018 में जहां साइबर क्राइम के मामले 1,374 रहे। वहीं, 2019 में ये बढ़कर 2,698 हो गए, इस तरह वह पहले स्थान पर रहा।

तीन साल में महाराष्ट्र में साइबर अपराध के 4500 से अधिक मामलों में केवल 56 लोगों की गिरफ्तारी हुई। इससे ये पता चलता है कि राज्य में साइबर आरोपियों के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए गए हैं और अपराधियों के भीतर पुलिस का खौफ नहीं है। 

साइबर वकील प्रशांत माली ने कहा कि खराब सजा दर पुलिस, न्यायपालिका और सरकार की वजह से है। उन्होंने कहा, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की समझ, पुलिस बल में इसका उपयोग और इस प्रयोग खराब है। इस मामले में महाराष्ट्र ने बड़ी प्रशिक्षण गतिविधि शुरू की है लेकिन इसमें समय लगेगा।  

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