साइबर जालसाजों ने 83 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला डॉक्टर को पांच दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 18.50 लाख रुपये ऐंठ लिए। आरोपियों ने खुद को पहले एयरटेल मुख्यालय का कर्मचारी और फिर महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताकर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। लगातार मानसिक दबाव और निगरानी में रखी गईं महिला डॉक्टर इतनी भयभीत हो गईं कि उन्होंने अपनी एफडी तुड़वाकर दो अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए पूरी रकम भेज दी।
इसलिए आसान निशाना बनते हैं बुजुर्ग
पूर्व आईपीएस और साइबर विशेषज्ञ प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, वरिष्ठ नागरिकों को कानूनी और डिजिटल प्रक्रियाओं की सीमित जानकारी होने से साइबर ठग आसानी से डरा देते हैं। सरकारी एजेंसियों, बैंक या टेलीकॉम कंपनियों का नाम लेकर भरोसा जीतना साइबर ठगों की आम रणनीति है। अकेले रहने वाले बुजुर्ग जल्दी मानसिक दबाव में आ जाते हैं और परिवार से सलाह लिए बिना ही रकम ट्रांसफर कर देते हैं।
डिजिटल अरेस्ट के बड़े मामले