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जुलाई के दूसरे सप्ताह में हो सकती है कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक

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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी - फोटो : Social media
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी पर अपनी राय नहीं थोपना चाहते। राहुल गांधी की राय से कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की राय पूरी तरह से मेल खाती है। यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी भी कांग्रेस पार्टी की केवल सक्रिय सदस्य और सांसद हैं। वह राहुल गांधी की तरह ही कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिए हर संभव सहयोगात्मक प्रयास करती रहेंगी, लेकिन कांग्रेस पार्टी के नए अध्यक्ष या अंतरिम अध्यक्ष के चयन में पूरे परिवार के सदस्य की कोई भूमिका नहीं होगी। राहुल गांधी के करीबी इसे पूरी तरह से स्पष्ट कर रहे हैं।

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10 जनपथ के सूत्रों का कहना है कि नेहरू-गांधी परिवार कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष, अंतरिम अध्यक्ष, पार्टी और संगठन के अन्य पदाधिकारियों आदि के चयन खुद को मुक्त रखना चाह रहा है। इसलिए न तो सोनिया गांधी, न ही प्रियंका और न ही राहुल अपनी कोई राय थोप रहे हैं। बताते हैं गांधी परिवार अपने आपको इस तोहमत से बचाना चाह रहा है कि राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया तो अब कांग्रेस पार्टी तय करे कि उसे किसे क्या जिम्मेदारी और कैसे देनी है।

सीडब्ल्यूसी की यह बात नहीं मानेंगे

कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी और तमाम नेताओं के सामने विचित्र सी स्थिति है। वह यह नहीं समझ पा रहे हैं कि क्या किया जाए? अंतरिम अध्यक्ष को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पा रही है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठतम महासचिव भी इस पद को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। पूरा मामला अब सीडब्ल्यूसी की बैठक में तय होगा। यह बैठक अगले सप्ताह होगी। इस बैठक में दो बड़े निर्णय होने हैं। पहला यह कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी के नेताओं और कांग्रेस सीडब्ल्यूसी की सर्वसम्मति से राय को मानते हुए अध्यक्ष पद का इस्तीफा वापस ले लें। पद पर बने रहें।
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सीडब्ल्यूसी के अधिकांश सदस्यों का मानना है कि राहुल गांधी के अध्यक्ष पद पर रहते हुए ही कांग्रेस को मजबूती दी जा सकती है। जहां तक समझा जा रहा है कि राहुल गांधी सीडब्ल्यूसी के आग्रह को विनम्रता पूर्वक न मानकर पार्टी के सर्वोच्च फोरम से नया अध्यक्ष चुनने का ही आग्रह करेंगे। ऐसे में सीडब्ल्यूसी के सदस्यों को आम राय से पार्टी का अगला अध्यक्ष चुनने और प्रक्रिया तथा पार्टी के संविधान के अनुसार नए अध्यक्ष का निर्णय लेना होगा।

कौन होगा कांग्रेस पार्टी का अगला अध्यक्ष

अगले सप्ताह होने वाली कार्यसमिति की बैठक में अगला अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद पार्टी के संविधान के मुताबिक नए अध्यक्ष के नाम को मंजरी के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सभी प्रतिनिधियों का सम्मेलन बुलाया जाएगा जिसमें पूरे देश के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

संभावित नामों में अभी चर्चा में अशोक गहलोत, सुशील कुमार शिंदे, मल्लिकार्जुन खडग़े समेत तमाम नाम चर्चा में चल रहे हैं। कार्यसमिति की बैठक की अध्यक्षता के लिए अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर वरिष्ठ नेता मोती लाल वोरा का भी नाम चल रहा है। कहा जा रहा है कि इस बार पार्टी का अध्यक्ष कोई दलित या फिर अन्य पिछड़ा वर्ग का व्यक्ति हो सकता है। लेकिन सबकुछ भविष्य की गर्त में है।

कांग्रेस अध्यक्ष चाहते हैं कि पार्टी के नेता एक महीने के भीतर पार्टी का पूर्णकालिक अध्यक्ष तय कर लें, ताकि कांग्रेस पार्टी में जान फूंकी जा सके। मूल में यह है कि कांग्रेस पार्टी में आमूल चूल सुधार की जरूरत है। राहुल गांधी के सचिवालय से जुड़े सूत्रों की माने तो पार्टी को प्रदेश संगठन से लेकर केंद्रीय ईकाई तक में युवा नेतृत्व की जरूरत है।

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