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कांग्रेस कार्यसमिति में प्रस्ताव पास, मीडिया में नहीं पार्टी मंच पर हो बात

Tue, 25 Aug 2020 02:38 AM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कांग्रेस की बैठक (File photo)
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कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पांच प्रस्ताव पारित किए गए, जिसमें असंतोष को पार्टी के मंच पर ही जाहिर करने की हिदायत दी गई। कार्यसमिति ने एकमत से सोनिया गांधी को समर्थन देते हुए पार्टी में जरूरी संगठनात्मक बदलाव के लिए अधिकृत किया। इसमें यह भी कहा गया है कि इस अहम मोड़ पर पार्टी एवं इसके नेतृत्व को कमजोर करने की अनुमति न तो किसी को दी जा सकती है और न ही किसी को दी जाएगी। प्रस्ताव में कहा गया है कि कोरोना काल में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अगले अधिवेशन के बुलाए जाने तक सोनिया भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष के गरिमामय पद पर नेतृत्व करें।

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चीन के दुस्साहस और बढ़ती गरीबी का जिक्र
पहला,
पिछले छ: महीनों में देश पर अनेक विपत्तियां आई हैं। देश के सामने आई चुनौतियों में कोरोना महामारी है, जो हजारों जिंदगी ले चुकी है, तेजी से गिरती अर्थव्यवस्था व आर्थिक संकट, करोड़ों रोजगार का नुकसान एवं बढ़ती गरीबी और चीन द्वारा भारतीय सीमा में घुसपैठ व कब्जे के दुस्साहस का संकट है।

सोनिया-राहुल ने जनता की लड़ाई का किया नेतृत्व
दूसरा, इस चुनौतीपूर्ण समय में सरकार की हर मुद्दे पर संपूर्ण विफलता को उजागर करने व विभाजनकारी राजनीति एवं भ्रामक प्रचार-प्रसार का पर्दाफाश करने वाली सबसे ताकतवर आवाज सोनिया गांधी और राहुल गांधी की है। प्रवासी मजदूरों की समस्याओं पर सोनिया गांधी के सटीक सवालों ने भाजपा सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित की। उन्होंने सुनिश्चित किया कि कांग्रेस शासित राज्यों में कोरोना महामारी को प्रभावशाली तरीके से संभाला जाए और स्वास्थ्य सेवाएं व इलाज समाज के हर वर्ग को उपलब्ध हो सकें। उनके नेतृत्व ने उच्च पदों पर बैठे लोगों को झकझोरा भी और सच्चाई का आइना भी दिखाया। राहुल गांधी ने भाजपा सरकार के खिलाफ जनता की लड़ाई का दृढ़ता से नेतृत्व किया। कांग्रेस के हर आम कार्यकर्ता की व्यापक राय व इच्छा को प्रतिबिंबित करते हुए कांग्रेस कार्यसमिति की यह बैठक सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी के हाथों व प्रयासों को हरसंभव तरीके से मजबूत करने का संकल्प लेती है। कार्यसमिति की स्पष्ट राय है कि इस महत्वपूर्ण मोड़ पर पार्टी एवं इसके नेतृत्व को कमजोर करने की अनुमति न तो किसी को दी जा सकती है और न ही किसी को दी जाएगी। आज हर कांग्रेसी कार्यकर्ता एवं नेता की जिम्मेदारी है कि वह भारत के लोकतंत्र, बहुलतावाद व विविधता पर मोदी सरकार द्वारा किए जा रहे कुत्सित हमलों का डटकर मुकाबला करे।  
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भाजपा सरकार से जवाबदेही मांगने के लिए लोगों को किया प्रेरित
तीसरी व एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे इन दोनों नेताओं की बुलंद आवाज ने कांग्रेस के अंदर व बाहर, भारतीयों को देशवासियों के साथ खडे़ होने और भाजपा सरकार से जवाबदेही मांगने व सवाल पूछने के लिए प्रेरित किया है, जबकि सरकार जनता को अपने खोखले व स्वनिर्मित मुद्दों में उलझाकर रखना चाहती है। उनके नेतृत्व में करोड़ों कांग्रेसी कार्यकर्ता व समर्थक बाहर निकल पड़े, ताकि मौजूदा भाजपा सरकार के अधीन शासन की भारी कमियों की भरपाई हो, जिनकी वजह से गरीब व मध्यम परिवार के लोगों को अपने अधिकारों व आजीविका से वंचित होना पड़ा।

अनुशासन जरूरी
चौथा, कार्यसमिति ने इसका भी संज्ञान लिया कि पार्टी के अंदरूनी मामलों पर विचार-विमर्श मीडिया के माध्यम से या सार्वजनिक पटल पर नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस कार्यसमिति ने सभी कार्यकर्ताओं व नेताओं को राय दी है कि पार्टी से संबंधित मुद्दे पार्टी के मंच पर ही रखे जाएं, ताकि उपयुक्त अनुशासन भी रहे और संगठन की गरिमा भी।
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जरूरी संगठनात्मक बदलाव के लिए सोनिया अधिकृत
पांचवां, कार्यसमिति कांग्रेस अध्यक्ष को अधिकृत करती है कि उपरोक्त चुनौतियों के समाधान हेतु जरूरी संगठनात्मक बदलाव के कदम उठाएं।
 

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