केरल में एक ईसाई प्रार्थन केंद्र में रहने वाले 17 वर्षीय लड़के ने कर्मचारियों पर मारपीट का आरोप लगाया। सीडब्ल्यूसी की जांच में अन्य बच्चों के साथ भी दुर्व्यवहार, मारपीट और जबरन काम कराने के संकेत मिले हैं।
एक ईसाई प्रार्थन केंद्र में रहने वाले 17 साल के लड़के ने कर्मचारियों पर मारपीट का आरोप लगाया। इस मामले की जांच बाल कल्याण समिति (CWC) ने की। शुरुआती जांच में पता चला कि वहां रहने वाले कुछ अन्य बच्चों ने भी कर्मचारियों के गलत व्यवहार और मारपीट जैसी घटनाओं का सामना किया है। अब मामले की आगे जांच की जा रही है। यह जानकारी एक अधिकारी ने शनिवार को दी।
क्या है पूरा मामला?
प्रार्थन स्थल को किया बंद
मामले को आगे की जांच के लिए पथानामथिट्टा जिले के एलावुमथिट्टा पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद, पथानामथिट्टा सीडब्ल्यूसी ने भी घटना की जांच शुरू कर दी है। सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष लीना के सुभाष ने यहां पत्रकारों को बताया कि आरोपों के सामने आने के बाद प्रार्थन स्थल को बंद कर दिया गया है। हालांकि, समिति ने केंद्र में रह रहे कई लोगों से बातचीत की, जिसमें बुजुर्ग व्यक्ति भी रहते थे।
अवैध रूप से रह रहे एक बच्चे को भी बचाया
उन्होंने आगे कहा, 'बच्चों ने बताया है कि उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें बिना वेतन दिए केंद्र में काम करने के लिए मजबूर किया गया।' पुलिस की जांच में पता चला है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शैक्षिक सहायता और रोजगार दिलाने में मदद के वादे पर केंद्र में रखा गया था। पुलिस के अनुसार, अनाक्कारा का रहने वाला 17 वर्षीय लड़का पिछले कुछ महीनों से उस केंद्र में रह रहा था। आरोप है कि उन्हें अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए कोई सहायता प्रदान नहीं की गई और इसके बजाय उन्हें वहां काम करने के लिए मजबूर किया गया। पुलिस ने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।