केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 31 दिसंबर, 2024 तक सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के 60 मामले लंबित थे। इनमें से 22 मामले चार साल से भी अधिक पुराने हैं। हाल ही में जारी सीवीसी की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि इन लंबित मामलों से देश की प्रमुख जांच एजेंसी की प्रतिष्ठा और छवि पर असर पड़ता है। इसमें कहा गया है कि 31 दिसंबर 2024 तक, सीबीआई के ग्रुप ए अधिकारियों के खिलाफ 39 विभागीय मामले और ग्रुप बी व सी अधिकारियों के खिलाफ 21 मामले विभिन्न चरणों में लंबित थे।
सीवीसी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत किए गए अपराधों की जांच के संबंध में सीबीआई की निगरानी करता है। अपनी रिपोर्ट में, सीवीसी ने भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की अनुमति के अभाव में संबंधित प्राधिकारियों के पास लंबित मामलों की प्रगति की भी समीक्षा की।
अभियोजन स्वीकृति के लिए 200 मामले लंबित
रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 के अंत तक भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत अभियोजन स्वीकृति के लिए कुल 200 मामले लंबित थे, जो 46 विभिन्न संगठनों से संबंधित हैं। इन मामलों में अभियोजन स्वीकृति के लिए 534 अनुरोध किए गए क्योंकि कुछ मामलों में एक से ज्यादा आरोपी हैं। कुल मामलों में से 106 मामले तीन महीने से अधिक समय से अभियोजन स्वीकृति के लिए लंबित हैं।
तीन माह में लें निर्णय
रिपोर्ट में कहा गया है कि सक्षम प्राधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अभियोजन की मंजूरी के मामलों पर तीन महीने के भीतर निर्णय लें। ऐसे मामलों में, जहां अटॉर्नी जनरल या अटॉर्नी जनरल के कार्यालय के किसी विधि अधिकारी से परामर्श की आवश्यकता हो, एक और महीने का समय दिया जा सकता है।
सीबीआई में 1502 पद रिक्त
सीवीसी के अनुसार, सीबीआई में 1500 से अधिक पद रिक्त हैं। पिछले साल 31 दिसंबर तक सीबीआई में कुल स्वीकृत पद 7300 थे, जिसमें से 5,798 अधिकारी कार्यरत थे और 1502 पद खाली पड़े थे।