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पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से सब कुछ हो जाएगा खत्म: सुप्रीम कोर्ट

Tue, 18 Feb 2020 09:43 PM IST
Trainee Trainee अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा, हरियाली को संरक्षित करना जरूरी है।
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कॉलेज में गिरा पीपल का पेड़।
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने देश में हरित क्षेत्र में लगातार हो रही कमी और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि जिस तेजी से पेड़ों की कटाई हो रही है, उससे जब तक लोग इसका परिणाम समझ सकेंगे तब तक सब कुछ खत्म हो जाएगा।
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चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा, हरियाली को संरक्षित करना जरूरी है। लोग इसका विकल्प तलाशने के लिए तैयार नहीं हैं। पेड़ों की कटाई न हो, क्या इसका कोई रास्ता हो सकता है। संभव है कि वह खर्चीला सौदा हो, लेकिन अगर पेड़ों की महत्ता या उपयोगिता समझी जाए तो बेहतर होगा।

अदालत चाहती है कि अर्थशास्त्री और पर्यावरणविद् की मदद से यह पता लगाया जाए कि एक पेड़ अपने जीवनकाल में कितना ऑक्सीजन छोड़ता है, उसकी आर्थिक व प्राकृतिक उपयोगिता क्या है। इसका वैज्ञानिक अध्ययन होना चाहिए।
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अदालत ने यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-112 को चौड़ा करने और उस पर रेल ब्रिज के निर्माण के लिए 340 पेड़ों की कटाई के खिलाफ एनजीओ की याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

एनजीओ की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि अगले 50 वर्षों में पर्यावरण और जलवायु की स्थिति बहुत खराब हो जाएगी। पीठ ने इस पर सहमति जताई। पीठ ने कहा कि वह देखेगी कि क्या इसे लेकर कोई सिद्धांत लाया जा सकता है।

वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि रेलवे लाइन के नजदीक करीब 800 लोगों की मौत हो चुकी है। इस कारण सरकार ने चार किलोमीटर लंबा फुटओवर ब्रिज बनाने का निर्णय लिया है। 
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