चीन को आर्थिक मोर्चे पर झटका देने की रणनीति को भारत सफल मान रहा है। चीन में इस कदम पर जिस तरह की प्रतिक्रिया हो रही है, उससे भारत को लगता है कि उसके इस दांव का उस पर बड़ा असर पड़ रहा है। यही कारण है कि भारत ने इस रणनीति पर आगे बढ़ाने का फैसला किया है। ऐसे में निकट भविष्य में भारत चीनी वस्तुओं पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने सहित कई ऐसे फैसले लेगा जिससे चीन को आर्थिक नुकसान उठाना पड़े।
चीन हमेशा से अपने पड़ोसियों के साथ माइंडगेम खेलता रहा है। भारत मानता है कि पाकिस्तान को पीओके में सैनिकों का जमावड़ा बढ़ाने, नेपाल को भारत के खिलाफ उकसाने जैसी चीन की रणनीति इसी माइंडगेम का हिस्सा है। दरअसल भारत ने भी चीन की आर्थिक मोर्चे के अलावा सामारिक मोर्चे पर भी घेराबंदी की है।
अमेरिका का दक्षिण चीन सागर के आसपास सैन्य जमावड़ा बढ़ाने, फ्रांस, जापान, जर्मनी जैसे देशों के समर्थन के कारण चीन की स्थिति भी सहज नहीं है। डोकलाम विवाद के दौरान भी चीन ने इसी तरह माइंडगेम का सहारा लेते हुए भारत पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की थी। हालांकि भारत ने अंत तक आक्रामक रुख जारी रखकर चीन को झुकने पर मजबूर किया था।
चीन के साथ द्विपक्षीय व्यापार में गिरावट पर भारत ने भी स्थिति का आकलन किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के मुकाबले चीन को ज्यादा घाटा उठाना होगा। चीन के जवाबी आर्थिक हमले में भारत को लघु और मध्यम उद्योग क्षेत्र में शुरुआती घाटा उठाना होगा, क्योंकि यह उद्योग कच्चे माल में चीन पर निर्भर है।
मगर इसका लाभ यह है कि निकट भविष्य में भारत कांच, सिल्क, दवाई सहित अन्य क्षेत्रों में खुद जरूरत का कच्चा माल बनाने की स्थिति में होगा। इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद के मामले में भारत के पास जापान-कोरिया जैसे देशों का विकल्प मौजूद है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक के संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने बुधवार को देश के बड़े उद्योगपतियों से पेटीएम जैसे भारतीय स्टार्टअप में चीनी निवेश को बाहर का रास्ता दिखाने की मांग की। स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा, चीन के निवेश को खत्म करने का यह एकमात्र तर्क संगत तरीका है।
उन्होंने कहा, भारत में चीन का निवेश हमारे 500 अरब डॉलर विदेशी मुद्रा भंडार की तुलना में महज 6 अरब डॉलर है। हमें बहुत चिंता नहीं करनी चाहिए। मैं बड़े उद्योगपतियों से मांग करता हूं कि वे चीनी कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाएं और उनके द्वारा स्टार्टअप में किए जा रहे निवेश को खुद करें। यह हमारे आधिपत्य को स्थापित करने का सुनहरा मौका है। उन्होंने विपक्ष द्वारा चीनी एप पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।