राजनीतिक दलों को चुनावी चंदे के लिए जारी बांड की प्रिंटिंग में करेंसी नोट जैसी गोपनीयता बरती जाएगी। सरकार इस प्रक्रिया को फुलप्रूफ पारदर्शी बनाना चाहती है, इसलिए इसमें इतने सारे सुरक्षा फीचर दे रही है कि बाजार में नकली बांड की गुंजाइश ही न रहे। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि बांड की प्रिंटिंग में सर्वाधिक सुरक्षा फीचर का ख्याल रखा जाएगा। जिस तरह करेंसी नोट की प्रिंटिंग को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है, उसी तरह बांड की प्रिंटिंग भी होगी।
सूत्रों ने बताया कि 15 दिन की वैधता अवधि वाले ये बांड किसी नए राजनीतिक दल को तोहफे में नहीं दिए जा सकते। इससे सुनिश्चित होगा कि कोई नया दानकर्ता रातोंरात अपना कालाधन सफेद न करने पाए। उन्होंने बताया कि
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की चुनिंदा शाखाओं में मिलने के अलावा ये बांड राज्यों की राजधानी और महानगरों में सबसे ज्यादा बेचे जाएंगे।
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दाताओं के नाम गुप्त रखना पीछे हटने वाला कदम: कांग्रेस
चुनावी बांड जारी होने को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि बांड में दाताओं के नाम नहीं होना दर्शाता है कि सरकार चंदे की पारदर्शिता से पीछे हट रही है। इससे सत्तारूढ़ दल को सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने की असीमित छूट मिल जाएगी।
चुनावी बांड में दाताओं के नाम छिपाकर मोदी सरकार ने चुनावी चंदे की प्रक्रिया को अपना पसंदीदा रंग ‘काला’ दिया है। इसका मतलब है कि पारदर्शिता का गला घोंटा जाएगा और दाताओं को चंदा देने के लिए बाध्य किया जाएगा।