आरिफ मोहम्मद खान को केरल का अगला राज्यपाल बनाए जाने की घोषणा हो चुकी है। इस घोषणा के बाद अपने पहले संबोधन में आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि आस्थाओं का संस्कृति से कोई संबंध नहीं होता। राम भारत देश की संस्कृति का आधार हैं और यह पहचान सभी धर्मों, सभी संप्रदाय के लोगों की है।
उपनिषदों में हिमालय से हिंद महासागर तक रहने वाले सभी लोगों को भारतीय कहा गया है। इसमें आस्था, रंग, भाषा जैसे आधारों पर किसी के साथ कोई भेद नहीं किया गया है। ऐसे में आस्थाओं के नाम पर इसी देश में रहने वालों की संस्कृतियां अलग-अलग नहीं हो सकतीं। रविवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि विविधता भारत की मूल आत्मा है। यह इसके लगातार विकसित होते रहने का आधार भी है।
आज वैज्ञानिक विविधता को मानव समाज ही नहीं, पशु और पेड़ों के विकास के लिए भी आवश्यक मानते हैं। इसे हमारे ऋषियों ने पहले ही आत्मसात कर लिया था। उन्होंने कहा कि ऊपर से दिखने वाली इस विविधता के बाद भी भारत की आत्मा एक है और इसके अंदर रहने वाले सभी आत्मीय रुप से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि आज वैज्ञानिक भी यह मानते हैं कि जो व्यक्ति ज्यादा भाषाओं का जानकार होता है, उसके अल्जाइमर रोग से पीड़ित होने की आशंका बेहद कम हो जाती है। यह असर विविधता को स्वीकार करने के कारण होता है। इस विविधता को सभी समाज के लोगों को भी स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभिन्नता किसी भी समाज के विकास के लिए आवश्यक होती है और इसलिए देश की विभिन्नता को सबको स्वीकार करना चाहिए।