केंद्र सरकार की 'रीढ़' कही जाने वाली केंद्रीय सचिवालय सेवा 'सीएसएस' में बड़े स्तर पर सेक्शन अफसर के पद खाली हो गए हैं। केंद्रीय सचिवालय में अनुभाग अधिकारी के लिए स्वीकृत 3640 पदों में से 1624 पद रिक्त हैं। लगभग 45 फीसदी पद खाली पड़े हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में कामकाज कितना प्रभावित हो रहा होगा। इतना ही नहीं, खाली पड़े पदों को पदोन्नति के जरिए भी नहीं भरा जा रहा।
कभी तो कोर्ट केस की बात आगे रख दी जाती है, तो कभी कोई दूसरा कारण बताकर सीएसएस अधिकारियों को पदोन्नति नहीं दी जाती। केंद्र सरकार में मंत्री और कई सांसद, कार्मिक मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिख कर 2013 बैच के 'एएसओ' को अनुभाग अधिकारी के पद पर तरक्की देने का आग्रह कर चुके हैं, लेकिन अभी तक डीओपीटी ने इस संबंध में कोई सकारात्मक पहल नहीं की है।
मंत्रालयों के बीच समन्वय बनाती है सीएसएस
केंद्रीय सचिवालय के कुल 93 मंत्रालयों एवं विभागों में, मौजूदा समय में अनुभाग अधिकारी (राजपत्रित) के अनेक पद खाली पड़े हैं। अनुभाग अधिकारी, एक अनुभाग का इंचार्ज होता है। उस पर नीति निर्माण एवं विभिन्न मंत्रालयों के बीच आपसी समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी रहती है। इसके अतिरिकत वीआईपी संदर्भ का निपटान करना, यह अहम जिम्मेदारी भी अनुभाग अधिकारी की होती है। सीएसएस फोरम (केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों की एसोसिएशन) के महासचिव मनमोहन वर्मा के अनुसार, सीएसएस अधिकारियों को पदोन्नति देने के लिए केंद्रीय मंत्रियों से लेकर अनेक सांसदों ने भी डीओपीटी मंत्री को पत्र लिखा है।
नौ साल भी नहीं मिली एएसओ को पदोन्नति
2013 बैच के एएसओ को अभी तक पदोन्नति नहीं मिल सकी है। डीओपीटी मंत्री कह देते हैं कि फीडर ग्रेड में कोर्ट केस होने के कारण 'एसओ' के पद पर नियमित पदोन्नति नहीं दी जा सकती है। डीओपीटी की गाइडलाइन कहती है कि ऐसे मामले में एडहॉक पदोन्नति दी जा सकती है। पहले भी दी गई हैं। अब विभागीय परीक्षा 2018 का नोटिफिकेशन निकला है। डीओपीटी ने इस मामले में कोर्ट केस का सहारा लेकर फीडर ग्रेड में एग्जाम करने का शेड्यूल तैयार किया है। जब यहां पर कोर्ट केस का सहारा लेकर परीक्षा का शेड्यूल जारी हो सकता है, तो उसी आधार पर पदोन्नति भी दी जा सकती है। संसद सत्र में भी सीएसएस अधिकारियों की बड़ी भूमिका होती है। इन पदों को अविलंब भरा जाए। अगर एएसओ को पदोन्नति मिलती है, तो निचले स्तर पर पद रिक्त होंगे और नए उम्मीदवारों को नौकरी में आने का मौका मिलेगा। इसके अलावा विभिन्न स्तरों पर पदोन्नति की राह भी खुल जाएगी। ख़ाली पदों पर योग्य अधिकारी लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे है। यदि सरकार अविलम्ब इन पदों को भर दे, तो एसएससी सीजीएल में सहायक अनुभाग अधिकारी लेवल पर इतनी ही संख्या में मिशन मोड में भर्तियां की जा सकती हैं। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी हाल ही में सीएसएस अधिकारियों की पदोन्नति का मुद्दा उठाया है।
रक्षा और गृह मंत्रालय में खाली पड़े हैं इतने पद
रक्षा मंत्रालय में सेक्शन अफसर (अनुभाग अधिकारी) के कुल 232 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 141 पद खाली पड़े हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में सेक्शन अफसर के 41 पद हैं, जिनमें से 27 पद रिक्त हैं। एमओएसटी में 51 पद हैं। मौजूदा समय में 40 पद खाली पड़े हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय में सेक्शन अफसर के कुल 296 पद हैं। इनमें से 112 पद खाली पड़े हैं। केमिकल मिनिस्ट्री में सेक्शन अफसर के कुल पद 12 हैं, इनमें से 10 पद खाली हैं। फार्मा में सेक्शन अफसर के कुल 16 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 13 पद रिक्त हैं। शिपिंग मंत्रालय में सेक्शन अफसर के लिए स्वीकृत 37 पदों में से 26 पद खाली पड़े हैं। जल संसाधन मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के 69 पद हैं। इनमें से 20 पद रिक्त हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के 39 पद हैं, जिनमें से 24 पद खाली हैं। इसी तरह श्रम मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के कुल 79 पद स्वीकृत हैं। मौजूदा समय में 35 पद खाली हैं। आवास और शहरी कार्य मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के 184 पदों में से 46 पद रिक्त हैं।
यहां भी पर्याप्त संख्या में नहीं हैं अनुभाग अधिकारी
कोल मिनिस्ट्री में अनुभाग अधिकारी के 24 पद हैं, जिनमें 15 पद रिक्त हैं। दूर संचार मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के लिए स्वीकृत 39 पदों में से 27 पद खाली पड़े हैं। लीगल अफेयर में सेक्शन अफसर के 31 पदों में से 13 पद रिक्त हैं। डाक विभाग में 49 पद हैं, जिनमें से नौ पद खाली हैं। नीति आयोग में अनुभाग अधिकारी के 28 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 10 पद खाली पड़े हैं। डीएफएस में अनुभाग अधिकारी के कुल 29 पद हैं। इसमें से 13 पद रिक्त हैं। शिक्षा मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के लिए 127 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें 41 पद खाली पड़े हैं। डीजीएचएस, एमओएचएफडब्लू में अनुभाग अधिकारी के 28 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 20 पद रिक्त हैं। ट्राइबल अफेयर में अनुभाग अधिकारी के लिए 19 पद मंजूर किए गए हैं, जिनमें से आठ पद खाली हैं।
डीओपीटी ने मंत्रालयों और विभागों को लिखा पत्र
डीओपीटी सचिव एस. राधा चौहान ने 21 जून 2022 को सभी मंत्रालयों और विभागों को एक पत्र लिखा था। इसमें खाली पड़े पदों को अगले डेढ़ वर्ष के भीतर मिशन मोड में भरने के लिए कहा गया था। उन्होंने यह जानकारी भी मांगी थी कि विभागों में ऐसे कितने पद खाली हैं, जिन्हें सीधी भर्ती और पदोन्नति के द्वारा भरा जाना है। विभागों से इस बाबत 27 जून तक एक्शन प्लान की जानकारी देने के लिए कहा गया। हालांकि इन मंत्रालयों एवं विभागों ने कार्मिक मंत्रालय को इन रिक्त पदों को जल्द भरने का अनुरोध किया है। इससे पहले सीएसएस फोरम (केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों की एसोसिएशन) ने इस साल पदोन्नति के लिए बड़ा संघर्ष किया था। धरना-प्रदर्शन के अलावा सीएसएस अधिकारियों ने नॉर्थ ब्लॉक में हल्ला बोल भी किया था। काले कपड़े पहन कर अपने हकों की लड़ाई को आगे बढ़ाया। उसके बाद केंद्र सरकार दबाव में आई और सीएसएस अधिकारियों की पदोन्नति के आदेश जारी किए थे।
ये सांसद भी लिख चुके हैं डीओपीटी मंत्री को पत्र
कई सांसदों ने पत्र लिखकर कार्मिक मंत्री को जल्द ही इन रिक्त पदों को भरने का अनुरोध किया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. राजकुमार रंजन सिंह ने हाल ही में डीओपीटी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखा है। अपने पत्र में उन्होंने 2013 बैच के सहायक अनुभाग अधिकारी 'एएसओ' को एडहॉक पदोन्नति देने का आग्रह किया था। डॉ. जितेंद्र सिंह ने पत्र के जवाब में कोर्ट केस होने का हवाला दिया था। इससे पहले गत वर्ष जल शक्ति एवं जनजातीय कार्य राज्य मंत्री विश्वेश्वर टुडू ने भी सीएसएस अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखा था। लोकसभा सांसद बेल्लाना चंद्र शेखर ने 15 सितंबर 2022 को डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर 2013 बैच के सहायक अनुभाग अधिकारियों को सेक्शन अफसर की पदोन्नति देने का आग्रह किया था। हरियाणा से लोकसभा सांसद रतन लाल कटारिया, छत्तीसगढ़ के लोकसभा सांसद विजय बघेल और लोकसभा सांसद रंजीता कोली ने भी डॉ. जितेंद्र सिंह को लिखे पत्र में सीएसएस अधिकारियों की पदोन्नति का मुद्दा उठाया था।