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Heat Wave: बढ़ते शहरीकरण, उमस से भारत के शहरों में जानलेवा बनी गर्मी, CSE की रिपोर्ट में अहम खुलासा

Tue, 28 May 2024 03:47 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सीएसई की अर्बन लैब के वरिष्ठ प्रोग्राम मैनेजर अविकल सोमवंशी का कहना है कि बढ़ते तापमान और उमस के चलते मानव शरीर में पसीने का वाष्पीकरण नहीं हो पा रहा है और उस वजह से शरीर की जो खुद अपने आप को ठंडा करने की प्रक्रिया थी, वो नहीं हो पा रही है। ऐसे में शरीर में गर्मी संबंधित समस्याएं बढ़ रही हैं।
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शहरों में बढ़ता खतरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बढ़ते शहरीकरण और उमस के चलते भारत के महानगरों में गर्मी का तनाव बढ़ रहा है और यह बर्दाश्त के बाहर हो रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक दशक की तुलना में अब भारतीय महानगरों में रात का तापमान ज्यादा नहीं गिर रहा है, जिसके चलते रातें ठंडी नहीं हो रही हैं। सीएसई ने जनवरी 2001 से लेकर अप्रैल 2024 तक देश के छह महानगरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बंगलूरू और चेन्नई के हवा के तापमान, सतह के तापमान और उमस के स्तर में आए बदलावों की समीक्षा की है।
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क्या है सीएसई की रिपोर्ट में
थिंक टैंक ने पाया है कि उमस का बढ़ता स्तर गर्मी के तनाव को बढ़ा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2001 से लेकर 2010 की तुलना में साल 2014 से 2023 के बीच बंगलूरू को छोड़कर देश के अन्य महानगरों में उमस 5-10 प्रतिशत बढ़ गई है। सीएसई की यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब देश के अधिकतर हिस्से भीषण लू की चपेट में हैं। सीएसई के रिसर्च की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉय चौधरी का कहना है कि गर्मी के बदलते ट्रेंड की समीक्षा से पता चलता है कि सतह का तापमान और उमस बढ़ने के साथ ही दिन और रात के तापमान में भी वृद्धि हुई है। ऐसे में शहरों में गर्मी से निपटने की कार्ययोजना विकसित करना जरूरी हो गया है। 

मानव शरीर के लिए जानलेवा क्यों हो रही गर्मी
सीएसई की अर्बन लैब के वरिष्ठ प्रोग्राम मैनेजर अविकल सोमवंशी का कहना है कि बढ़ते तापमान और उमस के चलते मानव शरीर में पसीने का वाष्पीकरण नहीं हो पा रहा है और उस वजह से शरीर की जो खुद अपने आप को ठंडा करने की प्रक्रिया थी, वो नहीं हो पा रही है। ऐसे में शरीर में गर्मी संबंधित समस्याएं बढ़ रही हैं और इसका असर जानलेवा हो सकता है। 
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रात के तापमान में हुई वृद्धि
अध्ययन में पता चला है कि भारत के महानगरों में रातों का तापमान सामान्य से ज्यादा है। साल 2001-2010 के दौरान देश के महानगरों में रात का तापमान दिन के तापमान की तुलना में 6.20-13.20 डिग्री सेल्सियस तक गिरता था। वहीं बीते 10 वर्षों में (2014-2023) रात का तापमान दिन की तुलना में 6.20-11.50 डिग्री सेल्सियस ही गिर रहा है। सोमवंशी ने कहा कि रातों में गर्मी ज्यादा होना खतरनाक है क्योंकि दिन में ज्यादा गर्मी के बाद रात में भी ज्यादा तापमान की वजह से लोग गर्मी से नहीं उबर पा रहे हैं। 'द लैंसेट प्लेनेटरी हेल्थ' की रिपोर्ट के अनुसार, गर्म रातों की वजह से भविष्य में गर्मी से होने वाली मौतें छह गुना तक बढ़ सकती हैं। 

मानसून के दौरान भी बढ़ेगी गर्मी और उमस
स्टडी में ये भी पता चला है कि बढ़ती उमस की वजह से भारत में मानसून के दौरान भी गर्मी पहले के वर्षों के मुकाबले ज्यादा रहेगी। बीते दो दशकों में भारत के महानगरों का विस्तार तेजी से हुआ है, साथ ही हरियाली भी कम हुई है। कोलकाता सबसे कम हरित क्षेत्र वाला महानगर है। वहीं राजधानी दिल्ली ज्यादा हरित क्षेत्र वाला शहर है। मुंबई, कोलकात और चेन्नई में भी हरियाली 14 प्रतिशत तक कम हो गई है। 
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