विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (सीएसई) की महानिदेशक और पर्यावरणविद सुनीता नारायण ने कहा कि भारत के बड़े हिस्से में भीषण गर्मी स्वाभाविक रूप से होने वाली अल नीनो घटना है, जो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का असामान्य रूप से गर्म होना और जलवायु परिवर्तन का नतीजा है।
नारायण ने कहा, इसके लिए कोई भी तैयार नहीं है। इन हालात से निपटने के लिए उन्होंने हीट इंडेक्स की जरूरत और आधुनिक शहरों के डिजाइनों में पूरी तरह बदलाव की जरूरत पर बल दिया है। सुनीता नारायण ने कहा कि 2023 वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड पर सबसे गर्म साल था। हमने पिछले 45 दिनों में 40 डिग्री से ऊपर के तापमान के साथ हर रिकॉर्ड तोड़ दिया है। यह जलवायु परिवर्तन है। यह इस साल (2023-24) अल नीनो के कम होने से और भी पेचीदा हो गया है। इसका मतलब है कि हमें वास्तव में अपने काम को एक साथ करने की जरूरत है। हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि कमजोर समुदाय कम प्रभावित हों।
हीट इंडेक्स विकसित करने की जरूरत
नारायण ने एक हीट इंडेक्स विकसित करने की जरूरत पर बल दिया। यह हीट इंडेक्स सापेक्ष आर्द्रता को हवा के तापमान के साथ मिलाने पर मानव शरीर को कैसा तापमान महसूस इसे मापता है। उन्होंने कहा कि हमें अपने फोन पर मौजूद एयर क्वालिटी इंडेक्स की तरह ही हीट इंडेक्स की जरूरत है। हीटवेव आधुनिक कांच की इमारतों को भट्टियों में बदल रही हैं, जिससे रहने वालों को गर्मी लग रही है और इससे निपटने के लिए नए वास्तुशिल्प विज्ञान की सख्त जरूरत है।