प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चेन्नई जोनल ऑफिस-2 ने 'हैशपे' क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड केस में बड़ी कार्रवाई की है। मनी-लॉन्ड्रिंग की जांच के इस केस में ईडी ने आरोपी सैयद उस्मान (उर्फ बाबू) और दामोधरन बालचंद्रन को पीएमएलए 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ़्तार किया है। दोनों आरोपियों को पीएमएलए की स्पेशल कोर्ट ने तीन दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया है। क्रिप्टोकरेंसी के इस मामले में भोले-भाले निवेशकों को लुभाने के लिए बॉलीवुड सितारों संग कार अवॉर्ड समारोह आयोजित कराया गया। मुंबई में क्रूज शिप पर इवेंट हुआ। इन सबकी मदद से आरोपियों ने निवेशकों से 146 करोड़ रुपये एकत्रित कर लिए।
ईडी की जांच पुडुचेरी के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता, 2023 और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। ईडी की जांच से पता चला कि सैयद उस्मान, इमरान बाशा और उनके साथियों ने 'हैशपे' नाम से एक इन्वेस्टमेंट स्कीम शुरू की थी। इसे क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर पेश किया गया। अनेक निवेशकों को "टीसीएक्स" नाम की एक क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए अच्छा रिटर्न देने का वादा करके निवेश करने के लिए उकसाया गया।
जिन निवेशकों ने इस स्कीम पर भरोसा किया, उन्होंने बैंक ट्रांसफर, क्रिप्टोकरेंसी और कैश के ज़रिए निवेश किया। सैयद उस्मान, दामोधरन और उनके साथियों ने स्कीम को भरोसेमंद दिखाने और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए लॉन्च इवेंट और बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़ के साथ कार अवॉर्ड सेरेमनी जैसे कार्यक्रम आयोजित करके भोले-भाले निवेशकों को लुभाया। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए इस स्कीम में रेफरल कमीशन, सोशल-मीडिया प्रमोशन और मुंबई में क्रूज़ शिप पर एक इवेंट का भी इस्तेमाल किया गया।
इन तीन मुख्य तरीकों से जुटाए गए 146 करोड़ ...
सैयद उस्मान ने दामोधरन के साथ मिलकर अपराध से हुई कमाई को हासिल करने, उसकी लेयरिंग (परतें बनाने) और उसे दूसरी जगहों पर भेजने में अहम भूमिका निभाई। सैयद उस्मान बड़े पैमाने पर नकद निवेश संभालते थे। वह 'हिफाई सर्कल' के नाम से खुले बैंक खाते को चलाने में भी शामिल थे, जिसका इस्तेमाल निवेशकों का पैसा लेने के लिए किया जाता था। दामोधरन ने हैशपे सॉफ्टवेयर, डेटाबेस और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कामकाज को विकसित और मैनेज किया, जिसमें प्लेटफॉर्म के वॉलेट फंक्शन भी शामिल थे।
आगे यह भी पता चला कि अपराध से हुई कमाई को सैयद उस्मान, दामोधरन, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों के पर्सनल बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया था। इस कमाई का निवेश क्रिप्टोकरेंसी और अचल संपत्तियों (जैसे ज़मीन-मकान) में भी किया गया था। इससे पहले, ईडी ने इस मामले में एक सितंबर को चेन्नई, कोयंबटूर और कोलकाता में 11 जगहों पर तलाशी ली थी। गिरफ्तार किए गए आरोपी इमरान बाशा और हितेश कुमार अभी न्यायिक हिरासत में हैं।