प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चेन्नई जोनल ऑफिस-II ने पैन इंडिया क्रिप्टो करेंसी (हैशपे)' मामले में, 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के प्रावधानों के तहत पुदुचेरी की विशेष अदालत में एक अभियोजन शिकायत दायर की है। साथ ही, गत सप्ताह लगभग 14.16 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त (अटैच) कर लिया है। जब्त की गई संपत्तियों में तमिलनाडु, हरियाणा और नई दिल्ली में स्थित अचल संपत्तियां, एक बीएमडब्लू कार और बैंक खातों में जमा राशि शामिल हैं।
'हैशपे' के प्रमोटरों द्वारा निवेशकों से धन जुटाना
ईडी ने यह जांच पुडुचेरी के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर 'भारतीय न्याय संहिता, 2023' और 'सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000' की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। यह मामला 'हैशपे' के प्रमोटरों द्वारा निवेशकों से धन जुटाने से जुड़ा है। उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी-आधारित निवेश योजना की आड़ में निवेशकों को रोजाना 1% रिटर्न, निवेश की गई रकम का तीन गुना तक रिटर्न, रेफरल कमीशन, और लग्जरी कारों व विदेश यात्राओं जैसे इनाम देने का वादा किया था।
मल्टी-लेवल मार्केटिंग नेटवर्क का खेल
ईडी की जांच से पता चला है कि 'हैशपे' वेबसाइट "
hashpe.io" और एक मल्टी-लेवल मार्केटिंग नेटवर्क के जरिए काम करता था। इसके प्रमोटरों - इमरान बाशा, हितेश कुमार और सैयद उस्मान (उर्फ बाबू) - ने दामोधरन और अन्य साथियों के साथ मिलकर, आम लोगों को कैश पेमेंट, बैंक ट्रांसफर और क्रिप्टो एसेट्स के जरिए निवेश करने के लिए राजी किया। यह प्लेटफॉर्म टीसीएक्स और 'हैशपे' जैसे फर्जी क्रिप्टो कॉइन पेश करता था। बिना किसी वास्तविक ट्रेडिंग गतिविधि के ही मुनाफा दिखाता था।
'लीडर' कहे जाने वाले एजेंटों को कमीशन
नए निवेशकों से मिले पैसों का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने और 'लीडर' कहे जाने वाले एजेंटों को कमीशन देने के लिए किया गया। बाद में, पैसे निकालने (विड्रॉल) पर रोक लगा दी गई और प्लेटफॉर्म को बंद कर दिया गया। इससे निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा। आगे की जांच से पता चला है कि इस स्कीम के जरिए लगभग 112.91 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया गया था, जिसमें से कुछ हिस्सा निवेशकों को वापस कर दिया गया।
49.54 करोड़ रुपये की 'अपराध से आय'
निवेशकों के बाकी पैसे HIFY सर्कल' और अन्य संबंधित व्यक्तियों/संस्थाओं के बैंक खातों, तथा क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स में भेजे गए। इन पैसों का इस्तेमाल निजी खर्चों, लोन चुकाने, भारी कमीशन देने, प्रचार कार्यक्रमों और संपत्ति खरीदने के लिए किया गया। जांच के दौरान लगभग 49.54 करोड़ रुपये की 'अपराध से प्राप्त रकम' की पहचान की गई है। इससे पहले, एक सितंबर को ईडी ने 'हैशपे', इसके प्रमोटरों और साथियों से जुड़ी जगहों पर छापेमारी की थी। इसके बाद, पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत इमरान बाशा, हितेश कुमार, सैयद उस्मान (उर्फ बाबू) और दामोधरन को गिरफ्तार कर लिया गया। ये चारों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।