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2200 शहीद जवानों के परिवार को भी स्वास्थ्य बीमा देगी सीआरपीएफ

Mon, 16 Mar 2020 06:36 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सीआपीएफ के जवान(फाइल फोटो) - फोटो : Amar Ujala
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देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल सीआरपीएफ ने एक अनूठी पहल करने की तैयारी की है। करीब 3.25 लाख जवानों की मौजूदगी वाली सीआरपीएफ ने विभिन्न अभियानों में शहीद हुए 2200 जवानों के परिवारों को भी स्वास्थ्य बीमा देने का निर्णय लिया है। इसके प्रीमियम का भुगतान भी सीआरपीएफ ही करेगी। अभी तक शहीद जवानों के परिजनों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने के लिए बीमा प्रीमियम का भुगतान खुद करना होता था।

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केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) 19 मार्च को अपने 81वें स्थापना दिवस पर ‘हमारे शहीदों पर गर्व है, हम उनकी वीरता का मनाएंगे जश्न’ थीम को लांच करेगा, जिसके तहत शहीदों के परिवारों को संपूर्ण हेल्थ कवर दिया जाएगा। सीआरपीएफ के महानिदेशक एपी माहेश्वरी ने रविवार को बताया कि स्वास्थ्य बीमा का पूरा प्रीमियम भी सीआरपीएफ ही वहन करेगी, जो विभिन्न रैंक पर अलग-अलग होगा।

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सबसे कम प्रीमियम कांस्टेबल रैंक पर 30 हजार रुपये होगा। इसके बाद रैंक के हिसाब से बढ़ते हुए यह प्रीमियम अधिकारियों के लिए सर्वाधिक 1.20 लाख रुपये होगा। उन्होंने कहा, इससे करीब 2200 शहीद जवानों के परिजनों को लाभ मिलेगा और उनकी बेहतर देखभाल सुनिश्चित हो पाएगी।

पुलवामा हमले के शहीदों के परिजनों को दी गई थी सुविधा

एक वरिष्ठ सीआरपीएफ अधिकारी ने बताया कि पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आत्मघाती हमले में शहीद हुए 40 जवानों के परिजनों को स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम भुगतान की सुविधा दी गई थी। इसके बाद देश के विभिन्न सैनिक सम्मेलनों में जवानों से मुलाकात के दौरान सीआरपीएफ महानिदेशक के सामने यह मुद्दा उठा था। इसके बाद डीजी ने सभी शहीदों के परिजनों को इसके दायरे में लाने की विशेष मंजूरी दी है।
 

दिव्यांग जवानों को भी खास ट्रेनिंग

सीआरपीएफ महानिदेशक माहेश्वरी ने बताया कि विभिन्न अभियानों के दौरान दिव्यांग हो जाने वाले जवानों को भी हम नए कौशल में दक्ष करना चाहते हैं। इसके लिए विभिन्न दिव्यांग सहयोग व सूचना प्रौद्योगिकी संगठनों के साथ इन जवानों की ट्रेनिंग के लिए एमओयू साइन किए गए हैं।

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इन जवानों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर स्पेस तकनीक, विभिन्न भाषाओं व बोलचाल में दक्ष बनाया जाएगा, ताकि इन्हें सेवानिवृत्त करने सुरक्षा बल में ही दूसरे कामों में उपयोग किया जा सके। आईआईटी-हैदराबाद से भी दिव्यांग जवानों को दूरस्थ शिक्षा के तहत सूचना प्रौद्योगिकी में एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स कराने का समझौता किया जा रहा है।

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