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अब सुदूर इलाकों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का लेखा-जोखा तैयार करेगी CRPF

Thu, 30 Jan 2020 12:16 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
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CRPF DG AP Maheshwari - फोटो : Social Media
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देश के दूरवर्ती इलाके, जहां पर नक्सलवाद की छाया है या वे आतंकवाद से प्रभावित हैं, वहां पर केंद्र सरकार की योजनाओं का रिपोर्ट कार्ड सीआरपीएफ तैयार करेगी। उत्तर पूर्व के ऐसे राज्य जहां किसी उग्रवादी समूह या दूसरी बाधाओं के चलते सरकारी योजनाएं आम लोगों तक नहीं पहुंच पाती हैं, वहां पर अब सीआरपीएफ के जवान घर-घर पहुंचकर लोगों से योजना की प्रगति रिपोर्ट लेंगे।

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जैसे, उन लोगों तक योजना पहुंची भी है या नहीं। उन्हें किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। योजना के लिए उन्हें कौन सा फार्म भरना चाहिए और उसके बाद अगला कदम क्या होगा, यह मदद करने के लिए अब सीआरपीएफ के जवान उनके पास जाएंगे।
 

सीआरपीएफ डीजी डॉ. एके महेश्वरी के अनुसार, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें यह बात कही है। चूंकि झारखंड, छत्तीसगढ़, कश्मीर और उत्तर-पूर्व में कई ऐसे राज्य हैं, जहां पर लोगों को केंद्र सरकार की योजनाओं का पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है। इसके कई कारण हो सकते हैं। ऐसे कई इलाकों में सीआरपीएफ तैनात है। वहां पर इस सुरक्षा बल ने लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठाने के लिए सिविक एक्शन प्रोग्राम शुरू किया गया है।

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इसके लिए भी केंद्र सरकार बजट जारी करती है। कई जगहों पर देखने को मिला है कि केंद्र सरकार की योजनाएं लोगों तक नहीं पहुंचती। उन्हें कोई गुमराह कर देता है या उन्हें फार्म भरने में दिक्कत आती है, सीआरपीएफ जवान यह पता लगाएंगे। लोगों तक केंद्र सरकार की योजना पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास होगा।

डॉ. महेश्वरी के अनुसार, हमारे जवान घरों में जाकर लोगों से योजना के बारे में पूछेंगे। सबसे पहले उनसे पूछा जाएगा कि उन्हें इस योजना का पता है। क्या उन्होंने कोई कार्ड बनवाया है। अभी तक योजना का कितना फायदा मिला है। क्या कोई बिचौलिया है जो उन्हें परेशान कर रहा है। क्या उन्हें योजना के दस्तावेज तैयार करने में दिक्कत आ रही है। इस एजेंडे पर सीआरपीएफ काम करेगी।

इसके दो फायदे होंगे। पहला, लोगों को योजना का पता चल जाएगा और जिन्हें सही तरह से उसका लाभ नहीं मिलता है, उनकी समस्या का निदान हो सकेगा। दूसरा, सीआरपीएफ जवान जो प्रगति रिपोर्ट तैयार करेंगे, वह स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के पास भी पहुंचेंगी। इस रिपोर्ट के जरिए योजना के क्रियान्वयन में कहां पर कौन सी बाधा आ रही है, इसका पता लग सकेगा। उसके बाद सभी लोगों तक वह योजना पहुंचाई जा सकेगी।
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