देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल (सीआरपीएफ) के मुख्यालय द्वारा एक महिला अधिकारी सहित 18 कंपनी कमांडरों यानी सहायक कमांडेंट को अब 'सलाह पत्र' जारी करने का निर्देश दिया गया है। बल मुख्यालय के डीआईजी सीआर/विजिलेंस की तरफ से उन सेक्टरों को यह आदेश दिया गया है, जहां की बटालियनों में उक्त सहायक कमांडेंट तैनात हैं। सीआरपीएफ के बड़े अफसर, उन 18 सहायक कमांडेंट को बेवजह प्रताड़ित कर रहे हैं, जिन्होंने एसडीजी के लंच से दूरी बनाई थी।
अलायन्स ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन और सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने बताया कि यह, कैडर अफसरों का मनोबल तोड़ने वाली कार्रवाई है। एक तो सहायक कमांडेंट रैंक वाले अफसरों को डेढ़ दशक में पहली पदोन्नति नहीं मिल रही है और दूसरा, अब इनके साथ प्रताड़ना वाला व्यवहार किया जा रहा है।
सीआरपीएफ हेडक्वार्टर के एक अधिकारी से उक्त कार्रवाई को लेकर बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह एक विभागीय मामला है। इस पर ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता। इन कैडर अफसरों (प्रशिक्षु) पर आरोप है कि इन्होंने बड़े 'साहब' जो कि एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं, के वर्किंग लंच से दूरी बनाई थी। अगस्त में भी बल मुख्यालय के डीआईजी 'सीआर/विजिलेंस' की तरफ से इन कैडर अफसरों को तीन दिन में जवाब देने के लिए कहा गया था। कारण बताओ नोटिस' का तय अवधि में जवाब नहीं मिला। न ही उनकी यूनिट से ही कोई जवाब आया। पांच अगस्त को जारी नोटिस में कहा गया कि जिन अधिकारियों से जवाब मांगा गया था, वे अब बिना किसी देरी के जवाब प्रस्तुत करें। इस बाबत संबंधित इकाइयों से भी कहा गया कि वे इन कैडर अधिकारियों से जवाब मांगें।
कैडर अफसरों को यह चेतावनी दी गई थी कि वे 'कारण बताओ नोटिस' का जवाब नहीं देते हैं तो विभाग यह मान लेगा कि उनके पास खुद के बचाव में कहने के लिए कुछ नहीं है। इस स्थिति में कैडर अधिकारियों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है। सभी प्रशिक्षु अधिकारी रांची स्थित सीटीसी में जीओ टेक्नीकल कोर्स करने गए थे। उस दौरान वहां पर सेंट्रल जोन के एसडीजी अमित कुमार आए थे। उनका लंच कार्यक्रम था, लेकिन डेढ़ दर्जन अधिकारियों ने बड़े साहब के लंच से दूरी बना ली। यह मामला, बल मुख्यालय तक भी पहुंचा था।
अब पिछले दिनों एक बार फिर सीआरपीएफ के 18 सहायक कमांडेंट के खिलाफ कार्रवाई के लिए इनके संबंधित सेक्टर आईजी को लिखा गया है। पत्र में कहा गया है कि ये कैडर अफसर, कोर्स की समाप्ति पर वर्किंग लंच से अनुपस्थित रहे थे। तब सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) बिल 2026, संसद में पारित हुआ था। पूर्व कैडर अफसरों का आरोप था कि सुप्रीम कोर्ट ने 23 मई 2025 को जो फैसला दिया था, उसे समाप्त करने के लिए सरकार, उक्त सीएपीएफ एक्ट लेकर आई थी। विपक्षी दलों के अलावा पूर्व और सेवारत अफसर इस एक्ट के पक्ष में नहीं थे। सूत्रों का कहना है कि सांकेतिक विरोध करने के मकसद से अनेक अफसरों ने आईपीएस एसडीजी अमित कुमार द्वारा आयोजित लंच का बहिष्कार किया था। लंच से अनुपस्थित अफसरों को दोबारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। उसके बाद सभी अफसरों ने संबंधित अथॉरिटी के पास अपना जवाब भेज दिया। अब कहा जा रहा है कि वह जवाब संतुष्टिजनक नहीं है। उसमें तो वही बातें लिखी हैं जो पहले के पत्राचार में कही गई थी। इसके चलते अब बल मुख्यालय ने अब इन अफसरों के संबंधित सेक्टरों को इन्हें सलाह पत्र जारी करने का आदेश दिया है। उस सलाह पत्र की सर्विस बुक में एंट्री की जाएगी। जब भी कोई वरिष्ठ अधिकारी या विभाग सर्विस बुक चेक करेगा तो वह एंट्री उन्हें दिखाई देगी।
सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने कहा, सीएपीएफ एक्ट के पास होने के बाद उसका बड़े पैमाने पर विरोध देखने को मिला था। सोशल मीडिया में इस मुद्दे पर अनेक पूर्व अधिकारियों ने अपना पक्ष रखा। सोशल मीडिया में सीएपीएफ बिल का विरोध करने वाले सीआरपीएफ के डीआईजी बीसी पात्रा को सस्पेंड कर दिया गया था। जांच के बाद पिछले दिनों ही उन्हें बहाल किया गया है। उस वक्त बल के कई कैडर अफसरों का दूर दराज के क्षेत्रों में ट्रांसफर किया गया था। कई चुनिंदा अफसरों को मणिपुर भेज दिया गया। अन्य अफसरों पर गोपनीय कार्यवाहियों का दौर भी चला। अब सामूहिक तौर पर सलाह पत्र देकर ग्राउंड कमांडरों का मनोबल तोड़ने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।