सेट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ)
सेट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) ने छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों की ओर से किए गए हमले में मारे गए 25 सुरक्षा कर्मियों की मौत मानवाधिकार का उल्लंघन नहीं लगता है। बताते चले कि आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक ने इस घटना के संबंध में एक रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें कहा गया कि अप्रैल में हुए इस नरसंहार में मारे गए लोगों के मानवाधिकारों का उल्लंघन किया गया।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक जवाब में आरटीआई पर सुकमा घटना पर अपनी जांच रिपोर्ट साझा करने से इनकार करते हुए सीआरपीएफ के मुख्य सूचना अधिकारी ने कहा कि जब तक सूचना मानवाधिकार उल्लंघन और भ्रष्टाचार के आरोपों से न जुड़ी हो तब तक उन्हें साक्षा करने में छूट मिलती है। सुरक्षा मामले का हवला देते हुए उन्होंने कहा कि आरटीआई कानून के तहत खुलासा करने से छूट दी गई है।
सीआरपीएफ ने कहा कि हमने मानवाधिकारों का कोई उल्लंघन नहीं किया है और न ही मामले के तथ्यों में भृष्टाचार हुआ है। इसके अतिरिक्त आरटीआई के जवाब में कहा गया कि आपका आवेदन इस तरह के आरोपों का कोई संदर्भ नहीं बनाता है। विभाग आरटीआई अधिनियम -2005 के तहत इस संबंध में आपको कोई जानकारी उपलब्ध कराने के लिए उत्तरदायी नहीं है। आरटीआई कार्यकर्ता नायक ने कहा कि हो सकता ऐसा सुरक्षा बलों की ओर किया गया हो या नहीं भी। तथ्यों को साझा न करके सीआरपीएफ अपने सुरक्षा बलों के साथ अन्याय कर रही है।