देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में सिपाही के रैंक में पदोन्नति के अवसर बढ़ें, अनुशासन, जिम्मेदारी, सम्मान और मनोबल में वृद्धि हो, इसके लिए अब दोबारा से 'लांस नायक' और 'नायक' रैंक शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सीआरपीएफ महानिदेशालय ने प्रस्ताव तैयार कर उसे बल की सभी यूनिटों में भेजा है। संबंधित रैंक यानी सिपाही और हवलदार, इस बाबत 48 घंटे में अपने सुझाव हेडक्वार्टर को भेजेंगे। शुक्रवार को बल की सभी यूनिटों में भेजे गए प्रस्ताव को सैनिक सम्मेलन, बैठकें और रोल कॉल आदि में जवानों के समक्ष रखा जाएगा।
मनोबल में कमी और मानसिक थकान:
सामरिक नेतृत्व की कमी:
ये है प्रस्तावित समय-बद्ध कैडर संरचना
करियर में उचित प्रगति को बहाल करने और एक प्रभावी सामरिक कमान संरचना स्थापित करने के लिए, विशेष रूप से सीआरपीएफ जीडी कर्मियों के लिए समय-बद्ध 'एड-हॉक' (अस्थायी/विशेष) रैंक प्रगति का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत सिपाही को पांच साल में पहली पदोन्नति मिलेगी। वह पद लांस नायक का होगा।
सेक्शन-स्तर की कमान को मजबूत करना:
वरिष्ठता और जवाबदेही का स्पष्ट निर्धारण:
शुरुआत से ही नेतृत्व क्षमता विकसित करना:
करियर में ठहराव को दूर करना:
एक ही रैंक (बैज) के लिए दो दशकों से अधिक समय तक इंतजार करना जवानों का मनोबल गिराता है। पांच और 10 साल पर तय किए गए पड़ाव, करियर के स्पष्ट और हासिल किए जा सकने वाले लक्ष्य देते हैं, जिससे जवान अपनी शारीरिक और सामरिक क्षमता के चरम वर्षों के दौरान पूरी तरह सक्रिय और प्रेरित रहते हैं।
सेवा छोड़ने की दर में कमी:
वर्दी की गरिमा और सामाजिक प्रतिष्ठा:
फील्ड अनुशासन को मजबूत करना:
बीच के स्तर के एनसीओ (नॉन-कमीशंड ऑफिसर) रैंक, कंपनी ऑपरेटिंग बेस (सीओबी) के भीतर कमान की श्रृंखला को मजबूत करते हैं। जूनियर कांस्टेबल स्वाभाविक रूप से अपने वरिष्ठ लांस नायकों और नायकों के निर्देशों का पालन करते हैं, जिससे परिचालन के दौरान बेहतर अनुशासन और आपसी तालमेल बना रहता है।
वित्तीय और प्रशासनिक व्यवहार्यता:
चूंकि ये मध्यवर्ती रैंक तदर्थ / स्थानीय / टाइम स्केल आधार पर दिए जा सकते हैं, (जो मौजूदा एमएसीपी वित्तीय अपग्रेड के अनुरूप हैं), इसलिए इनसे होने वाला अतिरिक्त वित्तीय बोझ, मिलने वाले बड़े परिचालन लाभों की तुलना में नगण्य है। जनरल ड्यूटी कर्मियों के लिए 5 साल बाद 'लांस नायक' और 10 साल बाद 'नायक' के रैंक को तदर्थ एनसीओ रैंक के रूप में फिर से शुरू करना और उसके बाद 15 साल की सेवा पूरी होने पर 'हेड कांस्टेबल' के पद पर स्थायी पदोन्नति देना, सीआरपीएफ के निचले कैडर में आ रही ठहराव की समस्या का एक प्रभावी समाधान है।
यह रणनीतिक कदम, कर्मियों के सेवा छोड़ने की दर को काफी कम करेगा, सेक्शन-स्तर पर कमांड और कंट्रोल को मजबूत करेगा, युद्ध के लिए मनोबल बढ़ाएगा और पूरे बल में अनुशासन के उच्चतम मानकों को बनाए रखेगा। बल के पूर्व कार्मिकों का कहना है कि इस प्रस्ताव में वेतनमान की बढ़ोतरी का जिक्र नहीं है। रैंक के मुताबिक वेतन भी बढ़ना चाहिए। सिपाही के रिक्त पदों को अविलंब भरा जाए। अटैचमेंट को न्यूनतम किया जाए। नई व्यवस्था में एमएसीपी एवं अन्य वित्तीय लाभ प्रभावित नहीं होने चाहिए।