देश का सबसे बड़ा केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ', घने जंगलों में इसके अफसर या जवान, एक तरफ आतंकियों और नक्सलियों के लिए 'काल' हैं तो दूसरी ओर ग्रामीणों के लिए 'देवदूत' से कम नहीं हैं। नक्सलियों के गढ़ में जहां कदम-कदम पर आईईडी ब्लास्ट और एम्बुश का खतरा बना रहता है, वहां इस बल के जवान दो नहीं, बल्कि चार कदम आगे बढ़कर ग्रामीणों की मदद करते हैं। छत्तीसगढ़ के बीजापुर और तेलंगाना बॉर्डर पर स्थित पहाड़ी क्षेत्र 'कर्रेगुट्टा', जहां पिछले दिनों एक बड़ा ऑपरेशन 'ब्लैक फोरेस्ट' चलाकर वहां दशकों से बैठे नक्सलियों को खदेड़ा गया था, उसके करीब स्थित गांव पटेलपारा कर्रेगुट्टा में 48 वर्षीय एक व्यक्ति कोवासी अडामा गंभीर हाइपोटेंशन और हाइपोग्लाइसीमिया के चलते बेहोश हो गया। उसके परिजनों ने निकटवर्ती सीआरपीएफ एफओबी (151 वीं बटालियन) पर सूचना दी। मदद करने की गुहार लगाई गई। इस पर सीआरपीएफ ने तुरंत एसओपी तैयार कर कोवासी अडामा की मदद करने का निर्णय लिया। चारपाई का स्ट्रेचर बनाया। बरसात से बचने के लिए सीआरपीएफ ने अपने टैंट का प्लास्टिक कवर उतारकर ट्रॉली पर लगाया। 15 किलोमीटर दूर पामेड़ में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाने का इंतजाम किया।
सीआरपीएफ के आधिकारिक प्रवक्ता डीआईजी दिनाकरण बताते हैं, देखिये यह बल चाहे कहीं पर भी तैनात हो, इसके अफसर और जवान मानवता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। इस बल के द्वारा नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़े स्तर पर सिविक एक्शन प्रोग्राम चलाए जाते हैं। इनके तहत ग्रामीणों की कई तरह से मदद की जाती है। शिक्षा और स्वास्थ्य पर सीआरपीएफ का विशेष फोकस रहता है। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं को नक्सल प्रभावित इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों तक पहुंचाया जाता है। मसलन, आधार कार्ड और राशन कार्ड बनवाने में मदद दी जाती है। कर्रेगुट्टा में भी ऐसा ही हुआ है। लोगों को सीआरपीएफ पर अटूट भरोसा रहता है, इसीलिए मंगलवार की सुबह जब कोवासी अडामा की तबीयत बिगड़ी तो उसके परिजनों ने निकटवर्ती सीआरपीएफ के एफओबी पर सूचना दी।
सीआरपीएफ ने कोवासी की मदद करने की ठान ली। हालांकि ये सब आसान नहीं था। वजह, वह क्षेत्र नक्सलियों के प्रभाव वाला रहा है। नक्सली, केंद्रीय बलों को नुकसान पहुंचाने का कोई भी अवसर नहीं छोड़ते। ऐसे में अफसरों ने त्वरित गति से ग्रामीण की मदद करने का निर्णय लिया। टूआईसी नितिन शिवदास शिंदे के संज्ञान में यह मामला लाया गया। इसके बाद 151 वीं बटालियन से तत्काल, डॉ. नीरज पांडे, एसएमओ और मनीष मिश्रा, सहायक कमांडेंट के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई। बल की क्यूएटी के साथ यह टीम घटनास्थल पर पहुंची। बिना कोई देरी किए, घर पर ही कोवासी का इलाज शुरु किया गया।