डेढ़ महीने में डेढ़ करोड़ किलोमीटर की दौड़। सुनने में नामुमकिन सा लग सकता है, लेकिन सीआरपीएफ के जवानों ने ये लक्ष्य तय वक्त से एक दिन पहले ही हासिल कर लिया है। दरअसल देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' ने 47 दिन में एक करोड़ किलोमीटर दौड़ने का लक्ष्य रखा था। 15 अगस्त से शुरू हुआ ये अभियान दो अक्तूबर तक पूरा किया जाना था। लेकिन अपने जुनून की बदौलत जवानों ने इसे एक अक्तूबर को ही पूरा कर लिया। इसके लिए सीआरपीएफ के हर वर्ग के अधिकारियों, कर्मचारियों और जवानों ने रोज सुबह पांच किलोमीटर दौड़कर ये लक्ष्य पूरा किया और रिकॉर्ड बनाया।
'फिट इंडिया' और 'खेलो इंडिया' जैसे अभियानों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाले सीआरपीएफ जवानों ने इस अभियान के जरिये देश को फिट रहने के लिए रोजाना दौड़ने का संदेश देने की कोशिश की। लक्ष्य पूरा करने के मौके पर दिल्ली के विजय चौक से लेकर इंडिया गेट तक की दौड़ का आयोजन किया गया। इस दौरान 1961 में अर्जुन अवार्ड से नवाजे गए पहले खिलाड़ी जीएस रंधावा, पद्मश्री, कमांडेंट (सेवानिवृत्त), सीआरपीएफ ने इस दौड़ को झंडी दिखाकर रवाना किया।ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार, पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार विजेता खजान सिंह, डीआईजी सीआरपीएफ, अर्जुन पुरस्कार विजेता कुंजुरानी देवी, कमांडेंट सीआरपीएफ और अर्जुन पुरस्कार विजेता परमजीत सिंह, द्वितीय कमान अधिकारी सीआरपीएफ, भी इस मौके पर मौजूद रहे।
सीआरपीएफ के डीजी डॉ. एपी महेश्वरी और उनके सहयोगी अधिकारियों ने भी इस दौड़ में हिस्सा लिया। बल के ज्यादातर अधिकारियों और जवानों ने रोजाना पांच किलोमीटर की दूरी नापी है। उनके मुताबिक, इस पहल से बल के अधिकारी और जवानों का स्वास्थ्य बेहतर करने में मदद मिलेगी। सीआरपीएफ के आंतरिक सुरक्षा योद्धा पूरी लगन और समर्पण के साथ देश की सेवा कर रहे हैं। शारीरिक दक्षता और कर्मचारियों की कुशलता को सीआरपीएफ में खासा महत्व दिया जाता है, जो इसकी परिचालन दक्षता की निरंतरता के लिए ये जरूरी भी है।
इसी भावना के साथ सीआरपीएफ ने फिट इंडिया और खेलो इंडिया मिशन में बढ़ चढ़कर भाग लिया। 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2020 के बीच 1 करोड़ 50 लाख किलोमीटर पूरे कर अपने 1 करोड़ किलोमीटर दौड़ने का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। देश भर में सीआरपीएफ के अनेक संस्थानों में ऐसी कई दौड़ आयोजित की गई हैं। सीआरपीएफ बल के कार्मिकों के साथ साथ उनके परिवारों और नागरिकों ने भी इस दौड़ में पूरे उत्साह से भाग लिया।
ऐसे पूरा हुआ अभियान...
सीआरपीएफ में करीब सवा तीन लाख कर्मचारी हैं। ऐसे में यदि एक जवान रोजाना पांच किलोमीटर दौड़ता है तो निर्धारित तिथि यानी दो अक्तूबर तक यह आंकड़ा तीन करोड़ के पार पहुंच सकता था। लेकिन बहुत सारे ऐसे कर्मचारी भी हैं जो व्यावहारिक दिक्कतों की वजह से रोजाना दौड़ नहीं सके। हालांकि वे अतिरिक्त समय निकालकर दौड़ लगाते रहे। यह पहल सीआरपीएफ के अफसरों और जवानों का स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखने में कारगर साबित होगी और वे अपनी ड्यूटी उत्साहजनक तरीके से करेंगे।
इस अभियान के शुरुआत में डीजी महेश्वरी ने कर्मचारियों और जवानों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा था कि सभी अधिकारी और जवान अपनी पोस्टिंग वाली जगह पर दौड़ने का प्रयास करेंगे। कई ऐसी पोस्टिंग भी होती हैं, जहां ये संभव नहीं होगा। दो लाख कर्मी भी रोजाना पांच किलोमीटर चलेंगे या दौड़ेंगे तो एक माह में तीन करोड़ किलोमीटर का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यदि तीन लाख कर्मी तीस दिन तक रोजाना पांच किलोमीटर चलते हैं तो वह आंकड़ा 4.5 करोड़ किलोमीटर तक पहुंच सकता था। आखिरकार, सीआरपीएफ ने अब इस अभियान के बाद 47 दिन में डेढ़ करोड़ किलोमीटर चलने का लक्ष्य पार कर लिया है।